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Thursday, November 14, 2019

चर्चा - 3519

9 comments:

  1. आज बालदिवस है। मुझे साहिर लुधियानवी का यह गीत आज भी उस नटखट बचपन की याद दिलाता है जब हम बच्चों को हमारे अभिभावक यह सुनाया करते थे-

    बच्चे मन के सच्चे
    सारी जग के आँख के तारे
    ये वो नन्हे फूल हैं जो
    भगवान को लगते प्यारे
    खुद रूठे, खुद मन जाये, फिर हमजोली बन जाये
    झगड़ा जिसके साथ करें, अगले ही पल फिर बात करें
    इनकी किसी से बैर नहीं, इनके लिये कोई ग़ैर नहीं
    इनका भोलापन मिलता है, सबको बाँह पसारे
    बच्चे मन के सच्चे ...
    इन्ससान जब तक बच्चा है, तब तक समझ का कच्चा है
    ज्यों ज्यों उसकी उमर बढ़े, मन पर झूठ क मैल चढ़े...

    सच कहा -ज्यों- ज्यों हम बड़े हुए हमारा यह भोलापन, यह निश्छलता निजी स्वार्थ के बाजारों में खोती ही चली गई। हम ईश्वरीय गुण से दूर होते चले गये, सो आये आज हम बिल्कुल बच्चों की तरह पूरा दिन गुजारें और फिर रात इसपर तनिक चिंतन करें..।
    *******
    वैसे आज विश्व मधुमेह दिवस है। यदि हम अपने दिनचर्या को नियमित रखेंगे और गरीबों के आहार पर डाका नहीं डालेंगे तो इस रोग से काफी हद तक दूर रह सकते हैं।
    सभी को प्रणाम।




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  2. सुंदर रचनाओं से सजी सरस प्रस्तुति। बधाई दिलबाग जी।
    आज भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी का जन्मदिवस है जो कि बच्चों को समर्पित है और बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
    आज ही विश्व मधुमेह दिवस भी है। दुनिया में 425 मिलियन व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त बताए जा रहे हैं।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं।

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  3. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  4. उपयोगी लिंकों के साथ सार्थक चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।

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  5. बहुत ही सुंदर लिंको का समागम.... आज चाचा नेहरू जी का जन्म दिवस भी है और साथ ही साथ विश्व मधुमेह दिवस भी..

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  6. बहुत सुंदर लिंक्स, बेहतरीन रचनाएं।

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  7. बहुत सुंदर... मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभारl

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  8. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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