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Saturday, November 30, 2019

"ये घड़ी रुकी रहे" (चर्चा अंक 3535)

स्नेहिल अभिवादन। 
हैदराबाद में हुआ महिला डॉक्टर का गैंग रेप और बर्बर क़त्ल एक बार फिर हमें विचलित कर रहा है। क़ानून के ख़ौफ़ का अपराधियों में आख़िर क्यों असर नहीं हो रहा है? गवाहों को धमकाना आम बात है,डरे हुए गवाह क़ानून की मदद करने की बजाय अपराधियों की मंशा के अनुरूप व्यवहार करते हैं तो परिणाम होता है असामाजिक तत्त्वों के हौसले बढ़ना। न्याय में देरी समाज में अपराधों के पनपने का मुख्य कारण है। हालाँकि चार आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है क्योंकि जनता का दवाब बहुत अधिक था। 

आइये पढ़ते हैं मेरी पसंद की कुछ रचनाएँ-

-अनीता सैनी  
**
हवा  
को  
काटती हुई  
जंक लगी  
सदियों पुरानी  
शिवाजी 
**
नज़दीकियाँ 

ये     घड़ी     रुकी     रहे
रात    जाए   अब   ठहर,
दीवानगी  का ये  ख़याल
बेताबियों  को  भा  गया।
देखने   चकोर  चाँद  को
 नदी  के  तीर   आ  गया। ....
**
मित्रों, 
अडोल्फ हिटलर का जन्म आस्ट्रिया के
 वॉन नामक स्थान पर 20 अप्रैल 1889 को हुआ। 
उनकी प्रारंभिक शिक्षा लिंज नामक स्थान पर हुई। 
पिता की मृत्यु के पश्चात् 17 वर्ष की अवस्था में वे वियना चले गए।
**
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नही जानती किसी की नजर में , अहमियत मेरी ।

मैं जानती हूँ अपने घर में , हैसियत मेरी ।।

ओस का कतरा नहीं , जो टूट कर बिखर जाऊँ ।

कमजोर भी इतनी नहीं , यूं ही उपेक्षित की जाऊँ ।। **

रात्रि  के आठ बजने वाले हैं, 
आज सुबह उठने में देर हुई.
 उठते ही पहले की तरह मन उत्साह व शक्ति से भरा नहीं था. 
नींद जैसे पूरी न हुई हो,
 या फिर नींद पूरी नहीं है यह भाव अथवा विचार.. 
उसने स्वयं ही नींद को मृत्यु की निशानी मानकर 
सम्मान देना बन्द कर दिया था.
अश्क़ों की हथेली पे दामन के ख़्वाब सजा के आया हूँ
मैं अपनी वफ़ा के सूरज की इक रात बना के आया हूँ
नादान हवाएं क्यों इसको इक प्यार का मौसम समझ रहीं
मैं अहले-जहां के सीनों में तूफान उठा के आया हूँ
**
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आये थे तेरे शहर में मेहमान की तरह,
लौटे हैं तेरे शहर से अनजान की तरह !
तुम क्या जानों आशिक़ 
कैसे दिल को समझाते हैं,
दिल टूटने पर आँसुओं की 
बारिश से भींग जाते हैं,
**
रोनित रॉय : जान तेरे नाम से अदालत तक

ग्यारह अक्टूबर को भारतीय सिनेमा के 
महानायक अमिताभ बच्चन का जन्मदिवस पड़ता है 
जिसकी चर्चा सारे भारतीय मीडिया में होती है 
लेकिन इसी दिन एक और कलाकार का जन्म हुआ था 
जिसकी चर्चा कम-से-कम उसके जन्मदिवस पर होती हुई तो मैंने नहीं देखी । 
**
My Photo
हमारा सम्पूर्ण धर्म-कर्म वैज्ञानिक तथ्यों से भरा पड़ा है। 
वेद और ग्रंथो में जो भी व्रत उपवास और धर्मकर्म बनाये गए हैं
 उसके पीछे बहुत गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है 
जिसे अब विज्ञान भी मानने लगा है।
 व्रत, उपवास, तप, यज्ञ और विभिन्न संस्कारों में वैज्ञानिक तथ्य छुपे हुए हैं।
**
जी हा हम आपके दीवाने तो है , आवारा नहीं
तुम्हे हमारा मोह नहीं, और हमें जिस्म का
सौदागर है हम इश्क़ के
चाहने से नहीं मिलेगे
बंजारे है हम इश्क़ के
इश्क़ के बाजार में ही मिलेंगे…

सप्तरंगी इंद्रधनुष,
खुश्बुएं हजार किस्म,
भिन्न रूप-आकार लिए,
खिलती हूँ,खिलखिलाती हूँ,
प्रकृति के फूलों की महक सी,
मनमोहक बनके दिलों में समाती हूँ,
**
आज का सफ़र यहीं तक 
कल फिर मिलेंगे 
**
- अनीता सैनी 

16 comments:


  1. महिला चिकित्सक के साथ सामूहिक दुष्कर्म के पश्चात हत्या की घटना के संदर्भ में क्या कहा जाए..
    दिल को दहलाने वाली ऐसी अनेक घटनाएँ विगत 26 वर्षों में जब से पत्रकारिता में हूँ, अपने जनपद में देखता आ रहा हूँ। इनमें से कुछ मामलों में दुष्कर्मी हत्यारे पकड़े जाते हैं और कुछ में नहीं। जब मैं मिर्ज़ापुर आया था ,तो पहली घटना शास्त्री सेतु के नीचे देखने को मिली थी , जब एक युवती के साथ ऐसा घृणित कार्य कर दुराचारियों ने बड़ी निर्माता से उसकी हत्या की थी। उस अभागी युवती की पहचान अंततः नहीं हो सकी। पत्रकारिता क्षेत्र में आने के पश्चात वह प्रथम दृश्य आज भी नहीं भूल पाया हूँ।

    सिर्फ वासना की दृष्टि से औरतों को देखने की पुरुषों की यह कैसी प्रवृत्ति है .. ? इस व्यभिचार से क्या वह स्वयं को कभी भी ऊपर नहीं उठ सकता ?
    मानव को सभी प्राणियों में श्रेष्ठ कहा गया है , किन्तु सच तो यह है कि वह " विषय वासना" का एक पुतला मात्र है। जो अपनी ऐसी दुर्बलता पर कभी भी नियंत्रण नहीं पा सका है।
    प्रश्न यह भी है कि वासना की वस्तु त्याग कर और वनवासी होकर भी क्या वासना से पिंड छूट जाता है ..?
    नासूर बना यह मर्ज लाइलाज़ है.. ?

    मंच पर भूमिका के रूप में अनीता बहन आपने जो विषय रखा है , उस पर हम चाहे जितनी भी चर्चा कर लें , परंतु मानव की यह घृणित प्रवृत्ति नहीं बदल सकती है ..?
    सभी रचनाएँ श्रेष्ठ हैं और मेरा प्रणाम स्वीकार करें।



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    1. सुप्रभात शशि भाई.
      चर्चा में आपका सहयोग और आपके विचार हमेशा पढ़ने को मिलते. अपने विचार यों ही हम से साजा करते रहे. समाज से जुड़ी और बेहतरीन सूचनाओ से हमें भी अवगत कराते रहे. बहुत बहुत शुक्रिया आपका चर्चा में सम्मिलित होने के लिये.
      आभार
      सादर

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    2. जी प्रयास रहता है कि सुबह पौने चार बजे जैसे ही बिस्तर छोड़ूँ, चर्चामंच पर टिप्पणी कर के ही होटल से प्रस्थान करूँ..।

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  2. उपयोगी और सामयिक-अद्यतन लिंको के लिए आभार।
    धन्यवाद अनीता सैनी जी।

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  3. सभ्य समाज के कलंक और कुंठा पर प्रकाश डालती प्रभावशाली भूमिका । ऐसे कुकृत्यों पर प्रश्न उठते हैं और वक्त के साथ दब जाते हैं । दुख और क्षोभ से हृदय भर उठता है जब भी इस तरह की दुर्घटना प्रकाश में आती है । इस संकलन में मेरे सृजन को साझा करने के लिए हार्दिक आभार अनीता बहन ।

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  4. विभत्स मानवीय आचरण पर सरहनीय भूमिका, और अब समय आ गया है कि भारत की न्याय की देवी को आंख की पट्टी खोलकर बलात्कारियों को तुरत मृत्यु दंड का फैसला देना होगा। अब बहुत हो गया। बाकी समायक़ी पर अंकित सभी रचनाकारों की वेहतरीन रचनाओं के लिए साधुवाद।

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    1. परंतु या ना भूले की अनेक निर्दोष लोगों पर भी दुष्कर्म और दुष्कर्म के प्रयास के मामले दर्ज हो रहे हैं ।मैं पत्रकार हूँँ, ऐसी घटनाओं को देख रहा हूँँ किस तरह से कूट रचित मुकदमा कायम किया जा रहा है..

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  5. हैदराबाद की घटना के बारे में क्या कहूं? वेदना को व्यक्त करने में शब्द सक्षम ही नहीं हैं. आपने हमें अपने मंच पर स्थान पाने के लायक समझा इसके लिए धन्यवाद् दीदी.

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  6. बाकि सब छोटी मोटी घटनायें बना दी जाती है
    जहाँ बस वोट और राजनीति भगवान हो जाती है।

    दुखद।

    आभार अनीता जी।

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  7. बेहद दुखद वारदात, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और तुरन्त मिले, साथ ही समाज उनका बहिष्कार करे, तभी ऐसी घटनाओं को रोक जा सकता है. आभार आज की चर्चा में शामिल करने के लिए.

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  8. मेरी कविता " चाहत हो जाती हूँ " को इस मंच पर स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अनीता सैनी ! 🙏 😊

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  9. आज बहुत दिनों के बाद कुछ समय मिला है अनीता जी ! आज की चर्चा में अपनी रचना देख कर आनंदित हूँ ! आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार ! सप्रेम वन्दे !

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  10. बहुत सुंदर प्रस्तुति सारगर्भित एवं विचारोत्तेजक भूमिका के साथ. देश एक बार फिर उबल रहा है एक साथ कई महिला यौन उत्पीड़न के मामलों के उभरने और प्रशासन की नाकामी पर. न्याय मिलने में हो रही देरी बहुत बड़ा कारण है अपराधों के बढ़ने का. त्वरित न्याय की अवधारणा को विकसित होने में बड़े झोल हैं क्योंकि राजनीतिक इच्छाशक्ति लचर है.
    सभी रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ.
    मेरी रचना को मान देने के लिये सादर आभार अनीता जी.

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  11. फिर से एक अमानवीय कृत्य किया गया जितनी भी निंदा की जाए इस घटना की कम है लोगों की मानसिकता मनोरोगी वादी बनती जा रही है लोगों पर विश्वास करना भी आज के समय में बहुत बड़ी भूल साबित हो जाती है इसका ताजातरीन उदाहरण है कल हुई यह दुखद घटना न्याय प्रक्रिया बहुत लचर है और अपराधी को बचाने के लिए आज के समय में पूरा प्रशासन अमला ताला सभी लग जाते हैं वह बेचारे कहां जाएं जिनके साथ इस तरह की दुखद घटनाएं होती है..
    चर्चा मंच के जरिए अपने विचार थोड़ी सी रखवा ही हूं थोड़ी सी इसके संतुष्टि महसूस हो रही है लेकिन फिर भी पीड़िता को शायद ही हम न्याय दिला पाए इसके लिए बुरा भी लग रहा है
    .. सभी चयनित रचनाएं बहुत ही उम्दा और भवनीय है.. फिल्म कलाकार रोनित रॉय जी के बारे में पढ़ना बहुत रोचक लगा

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    1. ,*रखवा ही हूँ.. कि जगह रख रही हूं पढी़ जाऐ.

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