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Sunday, November 03, 2019

"कुलीन तंत्र की ओर बढ़ता भारत "(चर्चा अंक - 3508)

स्नेहिल अभिवादन।   
  अंधी दौड़ में कुछ लोग अपना आसमान सुनिश्चित करने में भूल ही जाते हैं कि 
 उनके पीछे एक भावी पीढ़ी चल रही है।  
 वह भावी पीढ़ी गहन अध्ययन और अनुसंधान के ज़रिये 
कुलीन पीढ़ी की धूर्तता को उजागर करती है
 तब बीते वक़्त की ज़्यादतीभरे इतिहास पर क्षोभ के बादल उमड़ने लगते हैं।

आइए अब आज की चर्चा के कुछ लिंक पर अपनी नज़र डालते हैं -
- अनीता सैनी 
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गीतिका 
"नगमगी 'रूप' ढल जायेगा" 
 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 
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इन दिनों अपने देश भारत में भी जो कुछ हो रहा है 
उससे इस बात की आशंका काफी प्रबल हो जाती है
 कि भारतीय लोकतंत्र एक बार फिर से कुलीन तंत्र की तरफ जा रहा है. 
एक ऐसे तंत्र की तरफ जहाँ सब कुछ, सारी सेवाएँ निजी होंगी. 
देश में अमीरों का जीवन जितना सुखकर और आरामदायक होगा, 
गरीबों का जीवन उतना ही कठिन.
 फिर एक दिन ऐसा होगा जब देश की बहुसंख्यक जनता सडकों पर होगी
 और तब कथित लोकतंत्र ही खतरे में पड़  
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लोरियाँ सुन - सुन कर, सो चुके बहुत तुम,
रास के सपनों में, खो चुके बहुत तुम।
जवानियाँ उठो तुझे, जगाने आ रहा हूँ।
जागरण के गीत, सुनाने आ रहा हूँ। 

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जेकर जाग जाला फगिया उहे छठी घाट आये.. 

काँच ही बांस के बहंगिया बहँगी लचकत जाये
पहनी ना पवन जी पियरिया गउरा घाटे पहुँचाय
गउरा में सजल बाटे हर फर फलहरिया
पियरे पियरे रंग शोभेला डगरिया
जेकर जाग जाला फगिया उहे छठी घाट आये..
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भ्रष्टाचार पर एक हास्य व्यंग पैरोडी -- 

My Photo
एक बिन बुलाये कवि ने,
कवि सम्मेलन में एंट्री ली।
संचालक महोदय ने उसे पुकारा भी नहीं ,
इससे पहले संयोजक ने उसे मंच पर ही धर लिया,
और सवालों की झड़ी लगा दी।
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किसी  ने  झील  की  गहराई  मापी ,किसी  ने  झील में  पत्थर  मारा ,
कोई  तैराक  था  तो  दी  झपकी ,किसी  ने  खून  बहाकर  मारा
किसी  ने  धूल  की  तिलांजलि  दी  ,कर  दिया  सर  का  आग़ाज़ 
किसी  ने  जोड़  दिया नहरों  से ,उसे  दरिया  बनाकर  मारा
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झील का पानी 
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My Photo
कीट फसल को चट करें,कृषक देखअकुलाए
फसलों का बचाव करें,रसायनिक छिड़काए।
कीट मरें सो तो मरे,जहर फसल घुल जाए।
बीमारी के कोण में,मानव को उलझाए।
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बरगद 

My Photo 

उसने सबको

खुली हथेली पर बोया था

बाँधकर संजोना नहीं आता था उसे

मुठ्ठी बाँधना भी तो न जानती थी वो

फिर भी...…

वो लोग सिमटे रहे 

उसी हथेली में

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चिड़िया का हमारे आँगन में आना :) 

चिड़िया की चहचहाट में जिंदगी के सपने दर्ज हैं 
और चिड़िया की उड़ान में सपनों की तस्वीर झिलमिलाती है 
चिड़िया जब चहचहाती है
तो मौसम में एक नई ताजगी और हवाओं में गुनगुनाहट सी आ जाती है 
चिड़िया का हमारे आँगन में आना हमारी जिंदगी में लय भर देता है
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नवयुवा अपने देश के,
    पढे-लिखे ,डिग्रीधारी
  सक्षम,समृद्ध, सुशिक्षित
 झेल रहे बेरोजगारी 
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शरारत  

शरारत जिंदगी ने की

खुद से जुदा होकर

मोहब्बत तुझसे की…

क्या यही खता है मेरी..,

वफा तुझसे करके ,

 बेवफाई खुद से की… 

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Jab Ishq hua tumse. 

Ishq shayari

मैं इश्क़ करके

तुमसे किस्से 

बनाना चाहता था।

पर इश्क़ हुआ

जब तुमसे

तुम तो कहानी

बन गयी। 

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आज का सफ़र यहीं तक  फिर मिलेंगे | 
  अनीता सैनी 

14 comments:

  1. कुलीन तंत्र पर भूमिका और लेख विचारणीय है। निम्न- मध्यवर्ग की स्थिति काफी दयनीय होती जा रही है । पूर्ववर्ती सरकारों ने इस वर्ग को अंधेरे में रखा और वर्तमान सरकार के सियासी जुमले अच्छे दिन आएंगे का भरपूर लाभ कुलीन वर्ग को ही मिल रहा है। वहीं, छोटे कारोबारी हतोत्साहित हैं और उनके यहां कार्य करने वाले लोगों का बुरा हाल है । उनके पगार में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हो रही है। सहकार क्या यह नहीं देख रही है की 5 -6 हजार रुपया प्रतिमाह वेतन पाने वाले ऐसे करोड़ों लोग किस तरह से अपना एवं अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
    प्रस्तुति की भूमिका काफी सशक्त है और रचनाओं का चयन भी उम्दा है। मेरे लेख को स्थान देने के लिए अनिता बहन आपका बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद और प्रणाम।

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  2. बहुत सुंदर आज की चर्चा मंच की प्रस्तुति। विचारोत्तेजक भूमिका के साथ प्रस्तुति का आग़ाज़। विविध विषयों पर आधारित रचनाओं का कौशलपूर्ण चयन। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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  3. अद्यतन लिंकों के साथ बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    --
    आदरणीया अनीता सैनी जी धन्यवाद आपका।

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  4. भूमिका में उठते सवाल अद्यतन ज्वलंत विषयों की ओर ध्यान प्रेषित कर रहे हैं ....कुलीन वर्गों का प्रपंच फैलता ही जा रहा है.. और एक आम मध्यमवर्ग उस प्रपंच में बुरी तरह से ठगा हुआ महसूस कर रहा है... अमीर अमीर होते जा रहे हैं और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं.. भावी पीढ़ी को इतिहास का हर एक पृष्ठ बदला हुआ सा मिलेगा कुछ ऐसा प्रतीत होने लगा है...... चिड़ियों का हमारे आंगन में आना पढ़ते ही एक सुखद अनुभूति दे गया.... कुसुम कोठारी जी की झील का पानी ठंड के आने की दस्तक दे गया बहुत ही बेहतरीन लिखा उन्होंने.. सभी चयनित लिंक अपने आप में खास है इतने अच्छे संकलन के लिए आपको बधाई....!!

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  5. बेहतरीन भूमिका प्रिय अनीता। उम्दा लिंक चयन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार सखी

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  6. वाह....

    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  7. सुंदर चर्चा अंक ,सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं

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  8. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति

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  9. निष्पक्ष और प्रतिष्ठित चर्चामंच पर मेरे लेख को स्थान देने के लिये आपका बहुत- बहुत आभार अनीता बहन, प्रणाम।
    मैं यह लेख काफी परिश्रम से लिखा था। अन्य मंचों ने इसे नहीं लिया तो तनिक कष्ट भी हुआ , परंतु चर्चा मंच ने मेरी रचना को स्थान दे मेर श्रम को सफल किया , सदैव यहाँ यहीं निष्पक्षता बनी रहे , छठ मैया से यह कामना करता हूँ।


    पिछला लेख मेरा नहीं लगा, तो मुझे लगा कि कुछ ठीक नहीं लिख पाया शायद, दरअसल मैं साहित्यकार तो हूँ नहीं न..
    यदि कोई त्रुटि हो तो आप सभी चर्चाकारों से उम्मीद करता हूँ कि मेरा मार्गदर्शन किया करे, पुनः प्रणाम।

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    1. सादर प्रणाम शशि भाई.
      कभी-कभी अच्छी रचना आँखों के सामने होते हुये भी छूट जाती है.या कहूं
      भागदौड़ भारी ज़िंदगी में जिम्मेदारी का निर्वहन अच्छे से नहीं कर पाती हूँ.इस का मतलब यह नहीं की लेखन अच्छा नहीं. हर रचना अपने आप में पूर्ण होती है सामने वाला उसे कितना समझता है और किस नजरिये से देखता उस पर निर्भर करता है.आप कभी जीवन में हताश न हो.आपकी लेखनी बेहतरीन है और आप एक साहित्यकार ही है आपने आप को कभी कम न आंकना. कठीन शब्दावली लिखने से ही कोई साहित्यकार नहीं होता. आप जन कवि हो भावगांभीर्य बेहतरीन है आप के लेखन में. कुछ साहित्यकार साहित्य दिमाग़ से लिखते है तो कुछ दिल से.आप दिल से लिखते है. ऐसे ही लिखते रहे कभी निराश न जीवन में
      सादर

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  10. आपका मार्गदर्शन अच्छा लगा

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  11. शानदार चर्चामंचलाजवाब प्रस्तुति...
    सभी रचनाएं बेहद उम्दा...मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदयतल से आभार एवं धन्यवाद।

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  12. This comment has been removed by the author.

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