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Friday, November 01, 2019

" यूं ही झुकते नहीं आसमान "(चर्चा अंक- 3506)

सादर अभिवादन।
चर्चामंच की मेरी पहली प्रस्तुति में आपका हार्दिक स्वागत है। अब मैं हरेक शुक्रवार आपसे मुखातिब होते हुए नई नवेली रचनाओं के माध्यम से हाज़िर हुआ करूंगी। चर्चामंच पर आकर आपके समक्ष पहली प्रस्तुति के साथ बहुत रोमांचित हूं।
आज नवम्बर का पहला दिन और गुनगुनी धूप का सुखद अहसास सबको प्रभावित करता है।
अनीता लागुरी  'अनु'  
आइए अब आपको अपनी पसंद की कुछ रचनाओं के लिंकों  की ओर ले चलूँ- 
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  यह त्यौहार बिहार का सबसे लोकप्रिय त्यौहार हैं जो झारखंड ,
पूर्बी उत्तरप्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में भी मनाया जाता हैं।
 वर्तमान समय में तो यह त्यौहार इतना ज्यादा प्रचलित हो चूका हैं
 कि विदेशो में भी स्थान पा चूका हैं। 
छठपूजा की बहुत सी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं 
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राजस्थान के बीकानेर से सामने आये 
एक मामले में डाक विभाग के एक डाकिये ने बीते एक साल से डाक नहीं बांटी थी | 
डाकिये के घर में 10 बोरी एटीएम कार्ड, 
पैन कार्ड, चेक बुक, शोक संदेश, सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र,
 आधार कार्ड, इंश्योरेंश के दस्तावेज़ और शादी के कार्ड मिले हैं |
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उड़ जा रे ! मन दूर कहीं 
जहाँ न हों,धर्म की बेड़ियाँ 
स्वास्तिक धर्म ही मानव कड़ियाँ 
बना बसेरा ! रैन वहीं 
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इर्द गिर्द उनके फिरें, ऐसे वैसे लोग
सम्मानित होने लगे, कैसे कैसे लोग ।।
मूल्यवान पत्थर हुआ, हुए रत्न बेभाव
गुदड़ी में ही रह गए, हीरे जैसे लोग।।
हरी है उम्मीद, खुले हैं उम्मीदों के पट!
विपत्तियों के, ऊबते हर क्षण में,
प्रतिक्षण, जूझते मन में,
मंद पड़ते, डूबते उस प्रकाश-किरण में,
कहीं पलती है, इक उम्मीद,
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फ़क़त ही याचना करके, कहाँ अधिकार है मिलता,
उठा गाण्डीव जब रण में, तभी आगार है मिलता।
नहीं मिलता यहाँ जीवन, बिना संघर्ष के कुछ भी,
अगर मन हार बैठे तो, कहाँ दिन चार है मिलता।

हे अंतरयामी ! 
निर्मल करो, उज्ज्वल करो, 
आओ एक नए दिन का
सहर्ष स्वागत करें ।
आए हैं सिया राम
लंका जीत कर ।
अभिनन्दन करें ।
भाई बहन रिश्ता होता खास है
कोई फ़र्क़ नहीं दूर है या पास है
ह्दय से जब एक दूजे से प्रेम हो
हर दिन ही होता फिर ख़ास है
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कविता 
मैं बाहर निकलता हूँ
और उठा लेता हूँ 
किसी की भावना से 
खेलता हुआ विषय 
जिस पर कविता बननी होती है 
मैं अपराधी हूँ कविता तेरा 
जो इस विषय पर तुझे लिख रहा हूँ 
Add caption
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 उजड़ रहा है
 साहेब 
धरा के दामन से 
विश्वास 
सुलग रही हैं 
साँसें 
कूटनीति जला रही है ज़िंदा 
मानस 
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आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे आपसे अगले शुक्रवार। 

अनीता लागुरी  'अनु'  

38 comments:

  1. आदरणीय शास्त्री जी के द्वारा स्थापित इस निष्पक्ष मंच पर एक और कुशल चर्चाकार के रूप में आपका स्वागत है। आपने अपनी प्रथम प्रस्तुति बड़े ही निष्पक्ष भाव से हम पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की है। समसामयिक और नई रचनाओं का चयन किया है । वैसे, तो शीर्षक से ही आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति झलक रही है और भूमिका में गुनगुने धूप के आनंद की बात कह आप अपने इस नये दायित्व का निर्वहन तनाव मुक्त हो करने का संदेश भी दे रही हैं ।
    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ है कि आप, बहन अनीता जी और रवींद्र जी सभी मिल कर आदरणीय शास्त्री जी के इस प्रतिष्ठित चर्चामंच को कुछ इसतरह से सजाएँँ- सवारे की, इस पर नजर डालने को पाठक विवश हो जाए और टिप्पणियों की भरमार रहे । सभी को सादर प्रणाम।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद शशि जी, आपकी प्रतिक्रिया ने मन को हर्षित कर दिया इस मंच से जुड़ने के बाद मुझे अपने आसपास कई साहित्यिक गतिविधियों से प्रतिदिन रूबरू होने का अवसर मिल रहा है... आपके द्वारा लिखी संस्मरण जीवन की सत्य घटनाओ को ना सिर्फ समक्ष रखती है साथ ही साथ सकारात्मक सोच रखने का भी एहसास कराती है.. जी मैं पूरा प्रयास करूंगी की चर्चा मंच के अपने सभी #आदरणीय सहयोगी(गुरुजनों) के साथ मिलकर इस मंच को हमेशा यूं..ही शिखर पर रखूं ..!!एक बार और आपका हार्दिक धन्यवाद कि आपने अपने सुंदर विचारों से मुझे अवगत कराया ...

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  2. प्रथम प्रस्तुति की अनंत एवं अशेष शुभकामनाएँ अनु...तुम्हारे सहयोग से साहित्य एवं समाज को नवीन दृष्टिकोण प्राप्त हो, प्रगतिपथ पर तुम सदैव अग्रसर रहो यही कामना है।
    तुम्हारी पसंद की सुंदर रचनाओं से सजी यह प्रस्तुति संग्रहनीय है।
    बधाई। सस्नेह।

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    1. सुप्रभात श्वेता दी, आपकी प्रतिक्रिया ने मन को हर लिया साहित्य सेवा का यह अवसर आप सबों की शुभकामनाओं का ही फल है! पूरी प्रयास करूंगी अपने होने का एक सशक्त प्रमाण मैं आप सबो के सामने प्रस्तुत कर पाऊं.सदैव साथ बनाए रखें... आपकी आनंदमय दिन की आशा करते हुए आपको ढेर सारी हार्दिक धन्यवाद..!!

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  3. सुप्रभात प्रिय अनु
    बहुत ही सुन्दर सजी है आपकी प्रथम प्रस्तुति.बेहतरीन रचनाएँ चुनी है आप ने कमाल की पारखी नजर है आपकी.भविष्य में इसी उत्साह के साथ साहित्य की दुनिया में डग भरो.मेरा स्नेह सानिध्य हमेशा आपके साथ है.प्रथम प्रस्तुति पर असीम शुभकामनाएँ और बहुत बहुत बधाई प्रिय अनु.

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    1. मेरी रचना को चर्चामंच पर स्थान देने हेतु तहे दिल से आभार आपका
      सादर

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    2. सुप्रभात अनीता जी.. बयान नहीं कर सकती हूं कि आप सबों के स्नेह से बींधे आशीर्वचन ने मुझे कितने हर्ष वितेरक उत्तेजना से भर दिया, प्रथम प्रस्तुति को लेकर मन में संशय की भावना जरूर पनपी थी, पर आपसबों के मार्गदर्शन और हिदायतो ने मुझे आप सबों के साथ होने का एहसास हमेशा करवाया.. पूर्ण रूप से संकलन की प्रस्तुति तैयार करने में मुझे अभी काफी समय लगेगा पर जानती हूं आप सरीखे सहयोगी गुरुजन हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते रहेंगे ब्लॉग जगत में #चर्चा मंच का एक विशिष्ट स्थान है.. यहां खुद को देख पाना अपने आप में ही एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ...मैं आप सभी का हृदय तल से आभार करूंगी कि आप आप सबों ने मुझे यहां सम्मिलित किया.. खासकर आपका..!!

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  4. बेहतरीन प्रस्तुति । चर्चा मंच की परिपाटी के अनुरूप सभी लिंक्स लाजवाब व उम्दा..अनु आपकी प्रथम प्रस्तुति ने मन मोह लिया ।आप एक सिद्धहस्त और कुशल चर्चाकारा हैं । आपकी प्रथम प्रस्तुति को देख और पढ़ कर यही भान हुआ । बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं अनु जी ।

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    1. .. बहुत-बहुत धन्यवाद। दी".. सोचा भी नहीं था कि आप सबों का इतना स्नेह मुझे मिलेगा... आप सबों ने साहित्यिक क्षेत्र में अपना अच्छा खासा योगदान दिया है ...और अभी भी देते आ रहे हैं! आप सबों के संरक्षण में बहुत कुछ सीखूंगी इसकी मुझे पूरी आशा है. अपना स्नेह और आशीर्वाद सदैव बनाए रखें धन्यवाद

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  5. बढ़िया प्रस्तुति। मेहनत नजर आ रही है। जारी रहे। शुभकामनाएं।

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    1. सुप्रभात सुशील सर जी, मुझे बेहद खुशी हो रही है कि आपकी भी शुभकामनाएं मेरे हिस्से आ गई.. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद हमेशा साथ बनाए रखें

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  6. सुंदर रचनाओं की प्रस्तुति।

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    1. जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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    1. जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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  8. चर्चामंच पर आपकी पहली प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएं अनु जी ,
    बेहतरीन प्रस्तुति ,चर्चामंच मेरी रचना को स्थान देने लिए हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार
    आप सभी को छठपूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

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  9. जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका... पर्व -त्योहार हमारे सामाजिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रखते हैं यही एक समय होता है जब हम आपसी वैमनस्यता को भूलकर एक हो जाते हैं ...छठ पूजा के ऊपर आपकी द्वारा लिखी गई विस्तृत लेख ने मुझे खुद भी बहुत सारी बातों से अवगत कराया जिनसे मैं पहले परिचित नहीं थी,सादर आभार आपका।..

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  10. आदरणीया अनु जी, सर्वप्रथम आपको इस प्रथम अनूठी प्रस्तुति पर ढेरों शुभकामनाएं।  साहित्य में आपकी निरंतर सक्रियता  एवं अमूल्य योगदान निसंदेह एक मील का पत्थर साबित होगा। आप जैसा  युवा साहित्यकार जो सदैव ही कुछ नया सीखने की इच्छा रखता है आजकल बहुत कम देखने को मिलते हैं। निसंदेह, सभी महाप्राण व दादी का तमगा धारण कर चुके हैं। सही है अपनी-अपनी खेती और अपने-अपने बैंगन,आलू टमाटर ! फिर क्या, बना लो अपनी-अपनी सब्ज़ी ! ख़ैर छोड़िए, चर्चा मंच की बढ़ती चर्चा से मैं अत्यंत आह्लादित हूँ। गर्व का अनुभव हो रहा कि आपने मेरी इस छोटी-सी दार्शनिक कविता को इस प्रतिष्ठित मंच पर स्थान दिया इसके लिए आभार। सादर 'एकलव्य'         

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद ध्रुव जी, आज मुझे बेहद खुशी हो रही है कि आप सबों ने मेरे प्रथम प्रयास को सराहा.. चर्चामंच ने मुझे सम्मिलित करके एक बेहतर मंच मुहैया करवाया है! जहां में और अच्छे से साहित्य सेवा में लग पाऊं ...आप सबों का मार्गदर्शन एवं सहयोग हमेशा बना रहे यही आशा करती हूं,

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  11. अनु जी की अगर यह पहली प्रस्तुति है तो मैं सोचता हूँ उनमें अपार संभावना है कि वे इस मंच को नई ऊचाई अवश्य प्रदान करेगी । ढेरों शुभकामनायें ।

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    1. .. बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद पुरुषोत्तम जी

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  12. भावों की तूलिका चली
    सुंदर शब्दों का आधार
    कोई तारा पथ छोड आया
    करने चर्चा मंच का श्रृंगार ।

    विलक्षण प्रिय अनु जी ।

    आपकी चर्चा मंच पर पहली प्रस्तुति शानदार ही नहीं मोहक और सच सर्दी की कुनकुनी धूप सी सुखद है,
    बहुत शानदार प्रस्तुति।
    अपनी रचना का शीर्षक आज की चर्चा के शीर्ष पर देख कितनी सुखद अनुभूति हुई मैं बयां नहीं कर सकती,आपनी पहली चर्चा में मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार।
    सभी रचनाएं उच्चस्तरिय पठनीय सभी रचनाकारों को बधाई।
    आप एक अनुपम चर्चाकार बनें
    शुभकामनाएं और बधाई।

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    1. .. बहुत-बहुत धन्यवाद कुसुम जी ...आपकी प्रतिक्रिया ने मन मोह लिया और साथ में आपकी लिखी पंक्तियां ..👌सोने पे सुहागा वाली बात हो गई सदैव साथ बनाए रखिएगा... अज्ञानता वश मैंने आपके लिए जो रिप्लाई लिखा था वह दूसरी तरफ कर आई थी इस भूल के लिए क्षमा चाहूंगी,

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  13. अनु जी, बधाई है । चर्चा के विभिन्न रंगों में एक रंग और जुड़ गया । बहुत अच्छा लगा संकलन । अनंत शुभकामनाएं । रचना चुनने के लिए हार्दिक आभार भी । आपकी प्रथम प्रस्तुति में जगह मिली ।

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    1. . बहुत-बहुत धन्यवाद noopuram जी, आप चर्चा मंच में आई ...अपने विचार रखें मुझे इसकी बहुत खुशी हुई हमेशा साथ बनाए रखिएगा🙏

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  14. .. मन मोह लिया आपकी सुंदर प्रतिक्रिया ने आप सबों के स्नेह से बींधे आशीर्वचन ने हौसलों को मेरे मजबूती प्रदान की हमेशा साथ बनाए रखिएगा....!🙏

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  15. बहुत-बहुत बधाई आपको ..आपकी प्रथम प्रस्तुति बहुत शानदार रही.. ज्ञात हो रहा है कि साहित्य के क्षेत्र में एक नया सितारा उभर रहा है सभी चयनित लिंक आपके व्यवहार कुशलता एवं पारखी नजर को जाहिर कर रहे हैं साहित्य क्षेत्र में योगदान देने वाले बहुत हैं परंतु हर किसी की रचना मन को नहीं छूती है अभी तक आपको जितना मैंने पढ़ा है आप अपवाद सिद्ध हो रही है। आपकी सारी रचनाएं मुझे भाव विभोर कर देती है मैं भी चाहूंगी कि मेरी कविताएं चर्चा मंच के पटल पर चमके।

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  16. वाह!
    शानदार प्रस्तुतीकरण अनु!

    चर्चामंच की इस धमाकेदार प्रस्तुति के लिये ढेरों बधाइयाँ और असीम शुभकामनाएँ।

    इस नई जवाबदेही को संजीदा होकर निभाना होगा क्योंकि ब्लॉग दुनिया का यह प्रतिष्ठित पटल साहित्यकारों में पिछले 10 वर्षों से सेवारत है और चर्चित है। भारतीय जीवन शैली की चिंतनधारा को मद्देनज़र रखते हुए रचनाओं का चयन और भूमिका के विषय चुनते हुए अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कीजिए। आदरणीय शास्त्री जी के सानिध्य में प्रस्तुति संबंधी और अधिक बारीकियाँ समझने को मिलेंगीं।

    सभी रचनाएँ एक से बढ़कर एक हैं। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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    1. जी रविन्द्र जी..शुरुआत से ही आपका मार्गदर्शन मिलता रहा है..आज अगर आप सभो के बीच आ पाई हूँ तो ये आपके ही मार्गदर्शन में ..वरना मुझे सिर्फ लिखना आता था..कहाँ कैसे ..किस तरह से अपनी रचनात्मक दिखाऊं इन बातों से अनभिज्ञ थी.अपने बहुत सारा ज्ञान मुझे दिया साथ ही साथ...मै पूरी तरह से अपनी जिम्मेदारी पूरी करूँगी.. पितामह शास्त्री जी ने चर्चा मंच को पिछले दस सालों से सफलता पुर्वक आगे बढ़ाया, अब उतनी ही जिम्मेदारी के साथ मे भी जुट जाउंगी..।
      अंत मे आपका बहुत बहुत धन्यवाद,सदैव साथ बनाये रखें.!

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  17. वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति आदरणीया दीदी जी 👌आपने तो प्रथम प्रस्तुति में ही मन मोह लिया।सभी रचनाएँ भी बहुत उत्तम है सबको खूब बधाई।नारायण करें आप यूँ ही आगे बढ़ती रहे और साहित्य,समाज,चर्चा मंच और अन्य जिससे भी आप जुड़ें उसे नए,सुंदर और सुखद आयाम तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहें। माँ सरस्वती की कृपा आप पर सदा बनी रहे।हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
    सभी आदरणीय जनों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई। सादर नमन शुभ रात्रि 🙏

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आंचल तुम्हारी इतनी ढेर सारी शुभकामनाओ को में कैसे संभालूं यह सोच रही हूं,आज सुबह से सभो का प्यार और आदर बरम्बार मिलता रहा..सभो को प्रभावित कर पाई इसका बहुत सुकून है ..
      सैदेव साथ बनाये रखना..

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  18. प्रिय अनु  , आज   तुम्हारी ये सुंदर  , स्नेहिल    प्रस्तुति  देखकर मन आह्लादित हुआ |  अपने   धारदार  और शानदार लेखन की तरह यहाँ  भी तुम्हारे  प्रस्तुतिकरण में   मौलिकता रहेगी  मुझे विशवास है | चर्चा मंच ने   दूसरे   मंचों की तरह  हमारे जैसे   रचनाकारों  को  अनगिन पाठकों तक पहुंचा  कर एक पहचान दिलवाई   है | इस तरह के  प्रतिष्ठित मंच से जुड़ना बहुत बड़ा सौभाग्य है |अपनी इस नयी भूमिका में तुम अव्वल रहो मेरी  यही कामना है | , आजकल व्यस्ताओं के चलते बहुत से ब्लॉग  पर जाना होता है पर प्रतिक्रिया  नहीं दे पाती  उनमें एक ब्लॉग तुम्हारा भी है | ब्लॉग पर तुम्हारी वापसी से बहुत ख़ुशी हुई  |  लिखती रहो और हमेशा आगे बढो  और अपनी पहचान को नये आयाम दो |   बहुत- बहुत शुभकामनायें और बधाई |हार्दिक स्नेह तुम्हारे लिए |

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    1. आदरणीय रेनू दी, आप सिर्फ मेरी ही #दी नहीं हो आप सबकी दी हो जानती हो ऐसा क्यों क्योंकि आपके अंदर जो स्नेह की भावना सबके लिए उमड़ती है.. वह बहुत ही कम लोगों के बीच मैंने देखी है! आपकी टिप्पणियों में इतना अपनापन होता है कि मन बस झूम उठता है .…लगता ही नहीं है कि यह टिप्पणियां हमारी कविता यह हमारी किसी रचना के लिए है ऐसा महसूस होता है कि आप सामने बैठकर हमसे यह बातें कर रही है, आपकी शख्सियत से में शुरू से ही प्रभावित रही हूं...!! साहित्यिक गतिविधियां बोलचाल वह एक अलग बात है परंतु एक ही क्षेत्र में काम करते-करते एक आत्मीयता का एहसास भी होता है.. जो में हमेशा आपके लिए महसूस करती आई हूं बस इन्ही भावनाओ का आपके समक्ष रख दिया.. आपके द्वारा लिखी हर बात पर एक सुलझापन झलकता है जो दिशानिर्देश के साथ-साथ स्नेह में बांधे रखकर आगे बढ़ने को प्रेरित करता है ...आज मन थोड़ा विचलित था..संशय भी था कि मैं अच्छे से यह सारी चीजें संभाल पाऊंगी या नहीं पर आप सब ने इतना सहयोग दिया मुझे लगा ही नहीं कि यह मेरी पहली प्रस्तुति है सब कुछ बहुत अच्छे से गुजर गया और यकीन मानिए अब मैं बहुत शांति महसूस कर रही हूं, आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद कहना चाहूंगी...!!

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  19. चर्चा मंच पर कल नहीं आ पाया इसकेलिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।

    मुझे बहुत खुशी हुई कि आप चर्चा मंच का हिस्सा बन गयी हैं।
    अब एक उम्मीद है कि ये लीक से हटकर कुछ और अच्छा हो सकता है। बोरियत भरी ब्लॉग जगत में कुछ हलचल सी मच जाए बस यही दुआ है।
    रचना तक आप नहीं बल्कि रचनाएं खुद आप तक चलकर आये ऐसी ऊंचाइयां प्राप्त करने की शुभकामनाएं देता हूँ।
    बेजान में जान झोंक दो।
    पहली ही पोस्ट से कुछ अलग सा होने लगा है।

    चर्चा मंच पर लोग आते है और रटि रटाई टिप्पणी देकर चले जाते हैं
    लेकिन अब लगता है ऐसा नहीं होने वाला अब यहां सार्थक चर्चा होगी जो होनी ही चाहिए।

    प्रत्येक रचना तक मैं नहीं पहुंच पाया लेकिन जितनी भी पढ़ी सब चुनींदा थी।

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    1. ..जी रोहितास जी..कोई बात नही ,देर आये दुरुस्त आये..मैं भी चर्चा मंच का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूँ.. यहां आप सरीखे साहित्यिक शख्सियतों से मुलाक़ात एक बहुत ही अच्छा अनुभव रहा,रचनाओं का संसार वृहत है..अनगिनत रचनाये रोज आंखों के सामने से गुजरती है,परंतु जब उन रचनाओं मे हम अपनी प्रतिक्रिया पूरी भवनात्मक के साथ देते है ,तो स्वत ही कवि या लेखक के साथ आत्मीयता का भाव पैदा हो जाता है..कुछ ऐसा ही यहाँ महसूस किया ..आप सभों ने सराहा मुझे इसके लिए हार्दिक धन्यवाद.. सदैव साथ बनाये रखें..!!

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  20. बहुत उम्दा लिनक्स मिले ... मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए बहुत शुक्रिया

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    1. जी मोनिका जी बहुत-बहुत धन्यवाद आप आईं और आपने अपने विचार रखें,

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  21. यहां के अभी पढ़ा ये आपकी पहली प्रस्तुति है और मुझे बहुत खुशी हुई कि आप चर्चा मंच का हिस्सा बन गयी हैं।आपकी मेहनत  और निष्ठा दिख रही है

    सार्थक,अच्छा चयन किया है आपने और शानदार प्रस्तुतीकरण अनु

    मेरी रचना को चर्चामंच पर स्थान देने हेतु तहे दिल से आभार आपका

    सादर

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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