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Sunday, November 24, 2019

"जितने भी है लोग परेशान मिल रहे"(चर्चा अंक- 3529)

स्नेहिल अभिवादन।
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जीवन के लिये आजकल चुनौतियाँ बढ़ती जा रहीं हैं. जीव में वनस्पति को भी शुमार किया गया है. कुछ प्रजातियाँ लुप्त हो चुकीं हैं तो कुछ लुप्त होने के कगार पर हैं. कभी हम भोजन, पानी, कपड़ा और आवास को बुनियादी संकट मानने हुए बुनियादी ज़रूरतें मानते थे अब इनमें दवाई और साँसों के लिये स्वच्छ हवा का संकट जुड़ गया है. 
अच्छाई और बुराई का संगम है जीवन तो हमें बुराइयों को कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. विषम परिस्थितियों से मुक़ाबला करने के लिये ख़ुद को तैयार रखना चाहिए. ज़िंदगी बहारों का चमन भी और ग़म का अथाह सागर भी... 
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आइये अब पढ़िए मेरी पसंद की कुछ रचनाएँ-    
-अनीता सैनी 
 पीठ में भोंका छुरा, ऐ दोस्त ! तू हमदर्द था,
बे-रहम दुनिया में, जी पाना, बड़ा सरदर्द था.
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शब्द 
दर्द के पुकार थे 
रोकर थकते नहीं थे 
वे पुन: पुनर्जीवित हो जाते थे 
*****
आस-पास के माहौल का इंसान पर काफ़ी असर पड़ता है।
 उस माहौल का एक बड़ा हिस्सा दूसरे इंसान ही होते हैं।
 एक कहावत है 
कि आप उन पांच लोगों का मिश्रण बन जाते हैं
 जिनके साथ आप सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं।
वंचितों की दुनिया
वंचितों की दुनिया में जिंदगी सहमी हुई है।
नीम अंधेरों में जैसे कोई रोशनी ठहरी हुई है।

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कल ही सब पढ़ा था, मित्र लोग पोस्ट डाल रहे थे, 
एक आदमी जो 1984 से 
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहा था, 
लगातार 35 वर्षों से ,
 उसने हर मंच पर आवाज़ बुलंद की 
आज वह अपनी ही लड़ाई हार गया 
*****
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 बीता कल यादों में सिमटा
आनेवाले कल का कोई पता नहीं 
तब किया वर्तमान में जीने का विचार 
हर पल है वेश कीमती |
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आज सुबह से ही फोन पर बधाइयाँ मिल रही है,
शादी की उनचालिसवी सालगिरह जो है 
( बधाई हो ,और कितने साल हुए ?)
 मैंने भी अब पूरा हिसाब बताया ….
इश्‍तेहार जिसमे होती है
कुछ सूचनाएं कुछ सन्देश
कुछ आकड़े कुछ वादे
जिसे खुद भी पढ़ो दूसरो को भी
पेट में पलती बिटिया बोली-
मुझे न मारो माँ- पिताजी।
जनम लेते ही बिटिया बोली-
मुझे न फेको माँ-पिताजी।
इंसानों की बस्ती में हैवान मिल रहे
जितने भी है लोग परेशान मिल रहे
कातिल है बड़े,कत्ल की फिराक में
मौत के ही सब तरफ सामान मिल रहे
आज का सफ़र बस यहीं तक  
फिर मिलेंगे अगले शनिवार,रविवार।   
*****
-अनीता सैनी 

11 comments:


  1. सब कुछ मिलावट है.. कभी कम , तो कभी अधिक.. मनुष्य को सदैव संघर्ष करना पड़ा है..आज वह शुद्ध वायु एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिये संघर्ष कर रहा है..
    एक प्रश्न तो यह उठता ही है कि क्या व्यक्ति संघर्ष के लिये ही संसार में आया है ..?
    वह तो जीने के लिये आया है.. ?
    वह हर मिलावट से ऊपर उस आनंद की खोज के लिये आया ?
    जहाँ तक पहुँचने के लिये उसे मगरमच्छों के इस दरिया को पार करने के लिये संघर्ष करना ही होगा ..।

    मगरमच्छ हैं पड़े हुए उस नदी  में हर तरफ,
    जो  खुशियों के समन्दर तक पसरी हुई है।

    ***
    समसामयिक भूमिका और बेजोड़ रचनाएँ भी पढ़ने को मिलीं।आपने चर्चामंच को सदैव की तरह संवारा है।
    ****
    बात राजनीति की करूँ तो सियासी बिसात पर ऊँट किस करवट बैठेगा,इसे जनता अब बिल्कुल नहीं जानती है।
    हाँ ,इन अवसरवादी राजनेताओं से एक सबक हम अवसर ले सकते है कि कोई किसी का स्थायी शत्रु नहीं है।
    वे सत्ता का तरमाल खाने के लिये ऐसा करते हैं, परंतु हमें अपनी बगियाँ को सुगंधित करने के लिये किसी से वैर नहीं रखना है , ताकि उसमें कहीं से दुर्गंध न आने पाए।
    आप सभी को प्रणाम।

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  2. सुप्रभात । बहुत सुंदर प्रस्तुति। सभी रचनाकारों की रचनाएँ बेहतरीन।सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।मेरी रचना को शामिल करने के लिए तहे दिल से धन्यबाद।

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  3. बहुत सुन्दर और मन लगाकर की गयी श्रमसाध्य चर्चा।
    आभार आपका अनीता सैनी जी।

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  4. मिलावट के इस दौर में न तो हवा शुद्ध है और न ही दवा, न तो पानी शुद्ध है और न ही ज़िंदगानी. लेकिन भ्रष्टाचार शुद्ध भी है और शाश्वत भी !

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  5. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद अनीता जी |

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  6. सुन्दर प्रस्तुति....

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  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति अनीता जी द्वारा।

    आज की प्रस्तुति में विभिन्न विषयों को समाहित करते हुए तमाम प्रकार की सुंदर रचनाएँ चर्चा में सम्मिलित हुईं हैं।

    जीवन पर विचारणीय भूमिका के साथ शानदार प्रस्तुति।

    जीवन सदैव सक्रियता और चलते रहने का नाम है अतः इसकी पेचीदगियों को समझना और सरलता को जीवन में उतारना हमारा दायित्त्व है।

    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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  8. वाह! बेहतरीन संकलन और रचनाएं। आभार!

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  9. वाह!प्रिय सखी ,बहुत खूबसूरत संकलन । मेरी रचना को समाहित करने के लिए हृदयतल से आभार ।

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  10. बेहतरीन संकलन जगह देने के लिए हार्दिक आभार।

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