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Wednesday, December 11, 2019

"आज मेरे देश को क्या हो गया है" (चर्चा अंक-3546)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक। 
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 
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सबसे पहले देखिए उच्चारण पर मेरा एक गीत
 "मख़मली परिवेश को क्या हो गया है"  
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जाड़े पर यौवन छाया है और इस मौसम पर 
यदि कुछ न लिखा जाये तो 
सरदी की सार्थकता ही क्या है?  
तो देखिये गूँगी गुड़िया पर अनीता सैनी  जी की यह रचना- 
सर्द हवाएँ 
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Ravindra Singh Yadav  जी का यह संवाद  
वर्तमान परिवेश में भी प्रासंगिक है- 
संविधान पर दादा और पोते के बीच संवाद 
गाँव की चौपाल पर अलाव 

सामयिक चर्चा का फैलाव 

विषयों का तीव्र बहाव 

मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। 

बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद...  

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शशि गुप्ता शशि जी ने व्याकुल पथिक पर 
एक मार्मिक और नाजुक रचना पोस्ट की है- 
माँ तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में 
रिश्ते न संभाल पाया जीवन के
माँ , तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में

बीता बसंत एक और जग में
जो पाया सो खोया मग में... 
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Anita जी का आलेख 
मन की शांति 
“दुःख, उदासी, शरीर में अस्थिरता, श्वास में कंपन आदि समाधि में अंतराय होते हैं. आध्यात्मिक दुःख यदि न हों तो अन्य दो प्रभावित नहीं कर सकते”.
आज सुबह टीवी पर उपरोक्त वाक्य सुना. वैदिक चैनल पर डॉ सुमन विद्यार्थियों को ‘पतंजलि योग सूत्र’ पढ़ाते समय कह रही थीं. समाधि शब्द सुनते ही उसके भीतर कोई कमल खिल जाता है. सम्भवतः योग के हर साधक का यही लक्ष्य होता है, वह भाव समाधि का अनुभव कर चुकी है, निर्विकल्प समाधि का अनुभव इसी जन्म में होगा, ऐसा स्वप्न भी कितनी बार देखती है....
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बंजारा बस्ती के बाशिंदे पर Subodh Sinha जी का 
सूरज से संवाद ...  देखिए- 
हे सूरज भगवान (पृथ्वी पर कुछ लोग ऐसा मानते हैं आपको) ! नमन आपको .. साष्टांग दण्डवत् भी आपको प्रभु !
हालांकि विज्ञान के दिन-प्रतिदिन होने वाले नवीनतम खोजों के अनुसार ब्रह्मांड में आपके सदृश्य और भी अन्य .. आप से कुछ छोटे और कुछ आप से बड़े सूरज हैं। ये अलग बात है कि हमारी पृथ्वी से अत्यधिक दूरी होने के कारण उनका प्रभाव या उनसे मिलने वाली धूप हम पृथ्वीवासियों के पास नहीं आ पाती।
अब ऐसे में तो आप ही हमारे जीवनदाता और अन्नदाता भी हैं। आपके बिना तो सृष्टि के समस्त प्राणी यानि जीव-जंतु, पेड़-पौधे जीवित रह ही नहीं सकते, पनप ही नहीं सकते।पृथ्वी की सारी दिनचर्या लगभग ठप पड़ जाएगी और हाँ .. बिजली की बिल भी दुगुनी हो जाएगी। है ना प्रभु... 
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ग़ज़लयात्रा GHAZALYATRA पर 
डॉ. वर्षा सिंह जी ने एक मुक्तक प्रस्तुत किया है- 

सलामत रहे इश्क़ ❤ ... 
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Kusum's Journey  (कुसुम की यात्रा) पर 
Kusum Thakur जी को 
जन्मदिन की बधाई ... 

वह जन्मदिन है याद मुझको
मेरा फोटो
वह जन्मदिन है याद मुझको आज भी

खबर आयी माँ कहे सौगात भी

थी नहीं मुझको खबर पहले कभी
सूचना मुझको मिली थी बस तभी... 
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Naresh Sehgal जी अपनी घुमक्कड़ी में  
की जानकारी दे रहे हैं- 
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झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव जी की 
लघुकथा : प्रयोपवेशन 
पढ़िये-
मेरी फ़ोटो
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iwillrocknow:nitish tiwary's blog. पर देखिए 
Nitish Tiwary का प्रेम गीत- 
 काजल को स्याही बनाके।
तेरी आँखों के काजल को स्याही बनाके लिख दूँ,
मैं अपनी ग़ज़ल में तुझको हमराही बनाके लिख दूँ... 
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स्वयं शून्य पर Rajeev Upadhyay जी ने  
विश्व कविता से एमिली डिकिंसन की कविता का
का एक अनुवाद प्रस्तुत किया है- 

क्योंकि मैं रुक ना सकी मृत्यु के लिए 

...तब से सदियाँ बीत गई हैं 
फिर भी मगर 
दिन से भी छोटा लगता है। 
मैंने सबसे पहले 
घोड़े के सिर का अनुमान लगाया 
जो शाश्वत की दिशा में खड़ा था। 
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अन्त में Sudhinama पर  
Sadhana Vaid जी की पुस्तक की समीक्षा- 

मौन का दर्पण -  

आदरणीया बीना शर्मा जी की नज़र से 

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11 comments:


  1. मख़मली परिवेश को क्या हो गया है?

     --बहुत सुंदर रचना है गुरुजी, संवेदना को झकझोर देने वाली...

    जब हम हर संबंध को स्वार्थ के तराजू पर तौलेंगे, तो उसमें मानवता का कोई सारोकार नहीं होता है। ऐसे संबधों में मानवोचित कर्तव्यों के लिए कोई स्थान नहीं होता है और फिर हमारे लिए हर बात का मतलब अपना अथवा पराया ही रह जाता है।
    ऐसी परिस्थितियों में इस परिवेश से इतर संवेदनाओं से भरी दुनिया में कदम रखने से हम वंचित हो जाते हैं। हमारा जीवन मेरा-तेरा में ही व्यर्थ हो जाता है।
    मखमली परिवेश का सृजन तब ही संभव है जब हम निहित स्वार्थ से ऊपर उठ कर अपने हृदय को सद्विचाररूपी धन से भरे।
    आज की विशिष्ट रचनाओं के मध्य मुझे भी स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार एवं सभी को प्रणाम।

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  2. बहुत ही सुंदर संकलन तैयार किया है आपने हमेशा की तरह आप के दोहेगीत शानदार और सार्थकता से भरे हुए हैं

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  3. आपको नमन और आपके द्वारा चयन कर चर्चा-मंच पर मेरी रचना को साझा करने के लिए आभार आपका ...

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  4. उत्कृष्ट रचनाओं से साक्षात्कार कराने हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय शास्त्री जी ! इस मंच की दिनों-दिन सफलता इस बात का द्योतक है कि आपका और आपकी टीम का, साहित्य के उत्थान में योगदान निरंतर बना रहा है। हम यह आशा करते हैं कि आपका प्रयास अनवरत ज़ारी रहेगा। सादर 'एकलव्य'    

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  5. बहुत सुन्दर सार्थक सूत्रों का संकलन आज की चर्चा में ! मेरे काव्य संग्रह "मौन का दर्पण" की समीक्षा को यहाँ स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  6. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति. मेरी रचना को स्थान देने के लिये तहे दिल से आभार आदरणीय.
    सादर

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  7. उत्कृष्ट चर्चा अंक।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति।

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  8. चर्चा-मंच पर मेरी रचना को साझा करने के लिए आपका आभार ...

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  9. सुंदर चर्चा 👌👌👌

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