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Sunday, March 08, 2020

" अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस " ( चर्चा अंक - 3634 )

स्नेहिल अभिवादन। 

अनीता जी गाँव गई हैं होली उत्सव मनाने ,उनकी अनुपस्थिति में मैं -कामिनी सिन्हा 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत करती हूँ            

आज अंतरराष्ट्रीय  महिला दिवस हैं। दरअसल, यह दिवस एक मज़दूर आंदोलन की देन है. इसका बीजारोपण साल 1908 में हुआ था जब 15 हज़ार औरतों ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों की मांग की थी। इसके अलावा उनकी मांग थी कि उन्हें बेहतर वेतन दिया जाए और मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए। एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया। 1975 में महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता उस वक्त दी गई थी जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी

 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर."

आप सभी सखियों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

नारी को समानता नहीं ,सम्मान चाहिए....

*********

दोहे  

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस  

"माता का अवतार"

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आओ महिलादिवस परऐसे करें उपाय।
जग में नारी-जाति परकहीं न हो अन्याय।।
**********
अकेली औरतें अकेली कहाँ होती हैं,  
घिरी होती हैं वे ज़िम्मेदारियों से, 
गिरती-उठती स्वयं ही सँजोती हैं आत्मबल,   
भूल जाती हैं तीज-त्योहार पर संवरना। 
कुछ करने की चाह लिए
अस्तित्व की परवाह लिए
 मन ही मन सोचा करती थी
बाहर दुनिया से डरती थी......
भावों में समन्दर सी गहराई
हौसले की उड़ान भी थी
 ऊँची वह कैद चहारदीवारी में भी,
सपनों की मंजिल चुनती थी....
**

अपनी पीड़ा किसी से न बांटती
 हर कार्य के लिए रहती तत्पार
 मुस्कान से सभी का करती  स्वागत 
लोगों के मुंह से सदा उसकी तारीफ  निकलती |
*******

औरतें

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नारी !नर तुमसे है
सृजनकारी हो तुम
अनुपम कृति हो तुम
आत्मविश्वास से भरी
अविरल निर्मल हो तुम
चंचल चपला मंगलदायिनी हो तुम
नारी !वीरांगना हो तुम।
*********
शीला मरे बेथल
आप जो सबसे ज़्यादा साहसिक कार्य कर सकते हैं, वह है खुद को पहचानना, 
जानना कि आप किसमें विश्वास  करते हैं और कहां तक जाना चाहते हैं
******

'हल्ला बोल' बोलती
आज़ादी के नारे लगाती

न सिर्फ अपने

बल्कि अपनों के हक़ को भी समझती

उन हकों के लिए जूझती

लड़कियां खूबसूरत लगती हैं
********

कई बेआवाज थप्पड़ों की याद दिलाती फिल्म ‘थप्पड़’


'थप्पड़' बस इतनी सी बात? बस इतनी सी बात पर घर छोड़ दिया?
इतनी सी बात पर तलाक ले लिया?पागल है क्या? 
कितना तो चाहता था उसका पति उसे, थोड़ा बहुत तो हो जाता है
 ऊंच-नीच. इतना एडजेस्टमेंट तो रिश्तों में चलता है. ऐसे सोचने लगें तो एक भी 
औरत घर में रहे ही न सब घर छोड़कर चली जाएँ. सारी शादियाँ टूट जाएँ.
********
नदिया ! तुम नारी सी!!
नदिया! तुम नारी सी -
निर्मल, अविकारी सी ,
 कहीं जन्मती कहीं जा मिलती -
नियति की मारी सी !!
********

सर्वार्थ हित क्रीड़ा


धधक रही  है ज्वाला जैसी
जनता में है हाहाकार
लावा जैसे फूट पड़ा है
डर की आँधी पारावार
धुंधला मेघ घिरा देश पर
अधोगमन की बाजी जोर।
वैर द्वेष का कारण ढूंढो
देखो निज प्रभुता की ओर।।
*******
और चलते -चलते
 शास्त्री सर की एक खास उपलब्धि पर उनको ढेरों शुभकामनाएँ 

 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

********* 

          कल होली की पूर्व संध्या पर होलिका जलाई जाएगी , होलिका जो बुराई पर अच्छाई की विजय का  प्रतीक है।  होलिका अज्ञान व अहंकार को निरूपित करती है, जबकि प्रह्लाद ईश्वर के प्रति निष्ठा व निश्छलता को।जैसे अग्नि समापन का प्रतीक है, वैसे ही अगले दिन खेला गया रंगोत्सव सृजन का परिचायक है।इस जीवनरूपी यज्ञ में कर्म ही हमारी आहुति हैं।अब वक़्त आ गया हैं हमें भी अपने कर्मो का अच्छे से भान हो जाना चाहिए। सिर्फ कमाना और परिवार का पालन पोषण करना ही हमारा कर्म नहीं हैं।

 देश और समाज के प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य हैं।

आज सम्पूर्ण विश्व त्राहिमाम कर रहा हैं ,अनहोनी की दस्तक अपने भारत के दरवाज़े पर भी हो रही हैं। ऐसे वक़्त में हमारी सतर्कता ,समझदारी और सावधानी ही हमें किसी भी अनहोनी से बचा सकती हैं।.ऐसे वक़्त में  सारी कटुता भुलाकर ,जाति -धर्म ,राजनीति -कटरपंथी सब भूलकर एकजुट होकर खुद की , परिवार की , समाज की रक्षा करना ही समय की मांग हैं और हमारा परमधर्म और परमकर्तव्य भी....

     (इस बार की  होलिका दहन की अग्नि में कपूर का प्रयोग 
       ज्यादा मात्रा में करें ,कपूर हवाओं को शुद्धता प्रदान करता है )

आज का सफर यही तक ,अब आज्ञा दे 

आपका दिन मंगलमय हो 

कामिनी सिन्हा  

--

22 comments:

  1. महिला दिवसपर आपकी भूमिका एवं प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय है ,कामिनी जी।
    सत्य कहा आपने कि नारी को समानता नहीं सम्मान चाहिए।
    नारीत्व की महिमा के संदर्भ में कहा गया है कि नारी प्रेम ,सेवा एवं उत्सर्ग भाव द्वारा पुरुष पर शासन करने में समर्थ है। वह एक कुशल वास्तुकार है, जो मानव में कर्तव्य के बीज अंकुरित कर देती है।
    परंतु उसकी एक सबसे बड़ी विशेषता कुंठा भी है... ।
    और नारी सर्वाधिक अपमानित पुरुष से नहीं स्वयं अपनों से होती हैं , यह भी सत्य है।

    सभी रचानकारों को प्रणाम और महिला दिवस की शुभकामनाएँ।

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    1. सहृदय धन्यवाद शशि जी ,आपने बिलकुल सच कहा ,कोई भी इन्सान अगर खुद की कदर नहीं करता न तो उसकी कोई कदर नहीं करता। तो सबसे पहले हमें खुद की ही खुद से कदर करनी चाहिए ,सादर नमन

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  2. सार्थक भूमिका के साथ बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    बहुत-बहुत धन्यवाद। सादर अभिवादन आपको।
    अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई हो।

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    1. सहृदय धन्यवाद सर , सादर नमन आपको

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  3. आभार आदरणीया कामिनी सिन्हा जी।

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    1. सर एक विनती हैं -आप हमारे बुजुर्ग हैं ,मार्गदर्शक हैं आप मेरा आभार व्यक्त ना किया करे ,बस हमें अपना आशीष दे सादर नमन आपको

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  4. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं और होली की भी ढेरों शुभकामनाएं

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    1. सहृदय धन्यवाद ,आपको भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और होली की ढेरों शुभकामनाएं, सादर नमन आपको

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  5. बहुत सुन्दर और सशक्त सारगर्भित भूमिका के साथ सुन्दर रचनाओं सजी लाजवाब प्रस्तुति कामिनी जी । चर्चा मंच की सभी महिला चर्चाकारों एवं समस्त महिला रचनाकारों और पाठिकाओं को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई💐💐

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    1. सहृदय धन्यवाद मीना जी ,इस स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार ,आपको भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की ढेरों शुभकामनाएं, सादर नमन आपको

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  6. आभार...
    शुभकामनाएँ..
    सादर..

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    1. सहृदय धन्यवाद दी ,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की ढेरों शुभकामनाएं, सादर नमन आपको

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  7. बहुत सुन्दर सार्थक और सारगर्भित भूमिका के साथ लाजवाब चर्चा मंच...सभी उत्कृष्ट रचनाओं संग मेरी रचना को स्थान देने हेतु हृदयतल से धन्यवाद आपका...
    अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं।

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    1. सहृदय धन्यवाद सुधा जी ,इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार

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  8. सुंदर प्रस्तुति सखी । बहुत अच्छी जानकारी दी तुमने आज के दिन के बारे में। सभी सखियों को मुबारक हो एक दिन हमारे नाम का🥰🥰🥰🥰। सभी रचनाएँ बेहतर। हार्दिक शुभकामनायें🙏🙏😊

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    1. सहृदय धन्यवाद सखी ,इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार

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  9. मुझे तो बस इतना पता है कि माँ नहीं होती तो मैं नही होता और पत्नी नहीं होती तो मेरे बच्चे / बेटियाँ नहीं होती। इसकी पटाक्षेप में नानी व दादी की भूमिका कैसे भूल सकता हूँ ।

    एक पुरुष तो महज कड़ी की भाँति है। हमारा पूर्ण अस्तित्व ही आपकी वजह से है।

    इस विशेष प्रस्तुति हेतु आदरणीया कामिनी जी को नमन ।

    मंच से जुड़े सभी सदस्यों, रचनाकारों व संयोजक गण को महिला दिवस व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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  10. और एक बात भूल गया कि
    आज हम जिस भी मंच पर शामिल होते हैं, महिलाओं की प्रधानता और उनकी उपस्थिति ही मंच को शोभायमान करते है उसकी गरिमा में चार चाँद लगाती दिखती हैं।
    उनकी प्रतिभा व कल्पनाशीलता देखते ही बनती है। सामान्यतः हम सभी ब्लॉग पर व्यक्तिगत टिप्पणी देने में समयाभाव की वजह से अक्षम होते हैं परन्तु इस मंच के माध्यम से उन समस्त महिला रचनाकारों को नमन करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं ।

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    1. सहृदय धन्यवाद पुरुषोत्तम जी ,इस सुंदर और सारगर्भित प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार,सादर नमन

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  11. सुन्दर प्रस्तुति, चर्चा कार व समस्त रचनाकारों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं

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    1. सहृदय धन्यवाद शालिनी जी ,सादर नमन

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