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Monday, March 30, 2020

ये लोग देश हैं, देशद्रोही नहीं ( चर्चाअंक - 3656)

सादर अभिवादन। 

           पशु-पक्षी, जीव-जंतु मानव के बदले व्यवहार से हतप्रभ हैं। दुनिया में इंसानी मौतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अपने हाथ की उँगली में परमाणु बम का बटन दबाकर पृथ्वी को तबाही की स्थिति में पहुँचाने की क्षमता रखने वाले राष्ट्राध्यक्ष आज कोरोना वायरस द्वारा फैलायी गयी महामारी के आगे बेबस और लाचार हैं।  वे अपने नागरिकों को ज़रूरी चिकित्सा सुविधाएँ नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं। महामारी पर नियंत्रण के कारगर उपाय विकसित नहीं किये जा सके हैं। 


                कोरोना महामारी से लड़ने में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एक लाचार संस्था के रूप में उभरा है। विश्व में महामारी से जूझने के लिये एक कारगर केन्द्रीय एजेंसी का तुरत प्रभावी कार्यक्रम तैयार रहना चाहिए। विश्व के अनेक देश जो संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के सदस्य हैं वे अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार विश्व में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर शोध और नियंत्रण, सहायता के लिये आर्थिक अंशदान करते हैं। स्वाभाविक है इसमें विकसित देश अधिक अंशदान करते हैं।  आज ज़रूरी है इस विश्व स्वास्थ्य संस्था को अधिक मज़बूत और कारगर बनाया ताकि कोरोना जैसी महामारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके और लोगों को असहाय होकर मरते हुए  देखते रहने की विकट स्थिति का मुक़ाबला सफलतापूर्वक किया जा सके।


-रवीन्द्र सिंह यादव 

आइए अब पढ़ते हैं मेरी पसंदीदा रचनाएँ।   
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साहित्य के प्रति मेरा रुझान बचपन से ही रहा है। 
आरंभ डायरी-लेखन से हुआ
आगे चलकर छोटी-छोटी देशप्रेम की कविताएँ लिखीं 
जब वे सराहीं गयीं तब एकांकी / प्रहसन लिखना शुरू किया।

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Hello Baby, Sank, Fly, Animal, Nature
थोड़े दिन के लिए 
चलो,पंछी बनकर देखें,
मुँह अँधेरे उठ जायँ,
चहकें साथ मिलकर,
डाली-डाली, पेड़-पेड़ फुदकें,
जहाँ मर्ज़ी बैठें
उड़ान भरें मुक्त आकाश में,
सूरज को क़रीब से देखें.
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यह नफरत का समय नहीं है, 
ये सरकार को कोसने का समय नहीं है,
 ये लेफ्ट राईट के खांचों में बंटने का समय नहीं है.
 ये समय अपने घरों में बैठे हुए 
बेघर होने का दर्द महसूस करने का है.
 अपने पांवों में लगातार चलने से होने 
वाले दर्द को महसूस करने का.
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यह २१दिन जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद है 
जिसमें संयम के साथ घर पर रहकर हम जिंदगी को बचा सकते हैं, 
संक्रमण के साथ डर के भाव भी लंबे होते जा रहे हैं
 देश विदेश में हुई तबाही के कारण लोगों के मन में
 डर बढ़ने लगा है कि कल क्या होगा ?
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इस बार, खिल सका न गुलाब!
न आई, कलियों के चटकने की आवाज,
न बजे, कोपलों के थिरकते साज
न चली, बसंती सी पवन,
कर गए, जाने पतझड़ कब गमन,
वो काँटे भी मुरझाए!
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बड़ी बड़ी चुनौतियों से गुज़रा है भारत देश, 
ये मुसीबत का दौर भी गुजर जायेगा… 
माना कि बेमौसम पतझड़ की बरसात हो रही है,
 एक दिन इसमें भी फूल खिल जायेगा! 
न हो उदास साथियों ये रात भी ढल जाएगी
 आश की किरणों से उजास हो जाएगा.... 
*****

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संकल्प 

से दुश्मन से जूझ रहे है
अंत का जिसका भान नहीं है
लड़कर कितना जीतेंगे 
हम इसक हमें कोई ज्ञान नहीं
फिर भी हमें डट कर लड़ना है
कोरोना को परास्त करना है
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सूने पड़े हैं आजकल नाना नानी के घर
नहीं होती टीवी के रिमोट के लिए लड़ाई
नानी सीख गई है वीडियो कॉल करना
अपनी दिनचर्या की रिपोर्ट देती सारी
बच्चे फ्लाईंग किस कर बोलते MISS U
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ब्रह्मांड जहाँ देखे मैंने कई प्रकार के दुःख...
सर्पों को दुःख है शरीर में हर वक़्त विष दौड़ते रहने का....
गिद्धों को दुःख है नोच नोच के माँस खाने की विशेषता का..
आज हमने एक दुनिया बेची
और एक दीन ख़रीद लिया
हमने कुफ़्र की बात की
सपनों का एक थान बुना था
एक गज़ कपड़ा फाड़ लिया
और उम्र की चोली सी ली

*****
आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले सोमवार। 

 रवीन्द्र सिंह यादव 

12 comments:

  1. सुप्रभात ।बहुत सुंदर और सराहनीय अंक।

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  2. विफलता में विकास का अंकुर भी छिपा रहता है। जब सर्वशक्तिमान होने का दर्प टूट जाता है। मानव जब अहंकार के रथ से नीचे उतर जाता है। तो उसे आत्मबोध होता है कि वह कुछ भी नहीं है । जो कुछ है वह प्रकृति है और यह प्रकृति कहती है कि सबको साथ लेकर चलो किसी का भी अत्यधिक दोहन मत करो।
    मुझे तो लगता है कि कुछ ही दिनों में मनुष्य का दृष्टिकोण बदल गया है। उसमें विश्व बंधुत्व का भाव जागृत हो रहा है।

    सदैव की तरह सशक्त भूमिका के साथ ही रचनाएँ भी मंच पर श्रेष्ठ हैं।
    सभी को सादर प्रणाम।

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  3. सार्थक भूमिका के साथ अद्यतन लिंकों की शानदार चर्चा।
    --
    आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

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  4. सुन्दर चर्चा. मेरी कविता शामिल की. आभार.

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  5. बहुत सुन्दर सार युक्त चर्चा, आपका हृदय से आभार रविन्द्र सिंह यादव जी मेरी रचना को शामिल करने के लिए.

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  6. आदरणीय सर सादर प्रणाम 🙏
    सभी उत्क्रष्ट रचनाओं का चयन किया आपने और प्रस्तुति भी बेहद उम्दा 👌सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    आदरणीय सर भूमिका के माध्यम से जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आपने हम सबका ध्यान आकृष्ट किया है और इन संस्थाओं पर जो प्रश्न खड़े किए है वो बेहद महत्वपूर्ण हैं और आज इन विषयों पर विचार करना,इस पर चर्चा करना बहुत आवश्यक भी है जिससे भविष्य में एसी पारिस्थितियों से लड़ने में हम सक्षम हो।

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  7. महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ ,बेहतरीन रचनाओं का संकलन ,सादर नमन सर

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  8. बहुत सुंदर श्रमसाध्य प्रस्तुति. बेहतरीन रचनाएँ. सभी को बधाई. आदरणीय शास्त्री जी सर के ब्लॉग पर मेरे साक्षात्कार को इस विशेष चर्चा में शामिल करने हेतु सादर आभार आदरणीय सर.
    सादर

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  9. सुन्दर चर्चा आपका हार्दिक धन्यवाद सपने को शामिल किया

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  10. बेहतरीन रचनाएँ .. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।

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  11. रविन्द्र भाई शानदार भूमिका सटीक सार्थक ।
    साथ ही शानदार लिंक चयन
    सभी रचनाएं आत्ममुग्ध करती ।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने केलिए हृदय तल से आभार।

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