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Friday, March 06, 2020

"मिट्टी सी निरीह" (चर्चा अंक - 3632)

    स्नेहिल अभिवादन।
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         हमारे सभी पाठक मित्रों एवं चर्चा मंच के सभी गुणी जनों को होली की अग्रिम शुभकामनाएँ। एक-दो दिनों में रंगों का त्योहार होली हमारे घर के आँगन में अपनी रंगत बिखेरने को तैयार खड़ा मिलेगा। पूरे देश में होली का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सभी जानते हैं होली की पूर्व संध्या में पुरानी खाट, आँगन में पड़ी लकड़ियों के ढेर आदि सब कुछ होलिका दहन की भेंट चढ़ जाते हैं।
होली के साथ कई पौराणिक कथाएँ भी जुड़ी हुईं हैं। वर्तमान हालातों को देखते हुए कई साल पहले की होली याद आ जाती है जब जीवन रंगों से भरा हुआ होता था।  होली के रंग उस वक़्त हमें ख़ुशियों के रंग में रंग देते थे। क्या हिंदू क्या मुस्लिम क्या सिख-ईसाई सभी जमकर गुझियाँ, दही-बड़े खाते थे और जमकर एक-दूसरे पर होली के रंग, अबीर,गुलाल लगाया करते थे।
 पर समय एक-सा नहीं रहता है। ख़ैर ये बातें तो चलती रहेंगीं लेकिन हमें एक और चीज़ से सावधानी बरतनी है, वह है चाइना से आयातित रंगो से क्योंकि कोरोना वायरस की दस्तक अब हमारे देश में भी धीरे-धीरे सुनायी दे रही है। बेहतर यही रहेगा कि हम इस वायरस के प्रभाव में आने से जितना हो सके बचें।
-अनीता लागुरी 'अनु'
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                    आइए अब पढ़ते हैं मेरी पसंद की रचनाएँ-

दोहे  

"5 मार्च-पौत्र प्राँजल का 22वाँ जन्मदिन"  

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

मना रहे थे लोग जब, होली का त्यौहार।
पौत्र रत्न के रूप में, मुझे मिला उपहार।।
--
जन्मदिवस पर पौत्र को, देता हूँ आशीष।
पढ़-लिखकर बन जाइए, वाणी के वागीष।।
..……...................
मिट्टी - सी निरीह
                                    
                                   
वही ज़हरीली हवा, 
पल-पल पड़ते, 
 कुलटा,बाज़ारु नाम के,  
 वही नुकीले पत्थर, 
 तुम्हें मिट्टी-सी, 
 निरीह मानते हैं  वे, 
...........
उम्र
                                                                       
ख़्वाबों की
मोटी किताब में
धुंधली पड़ती
नींद की स्याही से,
जीवन के बही-खातों का
हिसाब लिख,
उम्र सारे कर्ज़
 सूद समेत
 दोहराती है।
..........
सुना आँगन
 कितनी ही होली एवं दीपावली उसकी इसी घर में गुजरी हैं। वह आँगन जहाँ कृष्णजन्माष्टमी और सरस्वती पूजन पर्व पर अर्पित अपने कलाकौशल को भगवान जी के श्रीचरणों में समर्पित किया था 
................
....
नारी तन को देखकर,
लार टपकाते यहाँ ।
मनुष्य के मुखौटे में,
सियार छुप जाते यहाँ।
नवशक्ति के आराध्य ये,
रक्षा हेतु चण्डी चाहिए।
आज जीने के लिए ,
इक शिखण्डी चाहिए।
.......

किताब में 
लिखा ही नहीं 
ऐसा बिलकुल भी नहीं हैं 
ये कुछ नहीं जानते 
ये सब जानते है , 
नए जमाने की बातें  
पर ये 
उन पेड़ो की तरह
है  
......
तू जब भी मिलती थी मुझसे
बात करती थी
तो भर जाती थी ये...
ख़ुशनुमा, रुआंसे, उदास, तीखे
मोहब्बत भरे...
हर तरह के लफ्ज़
भरे हुए हैं इसमें....
...........



दो पल भी तुमसे देर ना होती!
क्या घड़ी भी तुमसे पूछ के चलती?
हरी- भरी यह सुंदर धरती 
क्यों देख तुम्हें इतना हर्षाती?

.......

जहाँ कक्षा के अन्य स्थानीय सहपाठी अपने आप को खास समझते थे वहीं रजनी स्थानीय होने के बावजूद बड़े प्यार से बात करती थी। उम्र में छोटी होने की वजह से वो मुझे दीदी कहा करती थी। मुझे सचमुच में वो अपनी छोटी बहन सी लगती थी। 
..............
जब भी भूखो मरने लगेगी 
उम्मीद कोई फिर आदतन, 
तोड़ के इक टुकड़ा उस चाँद का 
निवाला बनानिगल  जाऊँगी  
शायद ऐसे ही कर 
भूखी उम्मीदों का पेट भर पाउंगी !
........ 

एक कोना 
सेल्फ़ी के चक्कर में बाघ के बाड़े में गिर पड़ा रांची का एक युवक!
  यह घटना इतनी ज़्यादा ख़तरनाक है कि क्या कहूँ।आज हम सोचें कि इतना भी क्या पागलपन जो  सेल्फ़ी के चक्कर में हम अपनी जान ही गँवा बैठें।  #एक कोना में इस घटना के बारे में मैंने कुछ जानकारियाँ साझा की हैं जिन्हें देखकर हमें भी सीख लेनी चाहिए।

अब बस 
आज्ञा दें अनु को। 

अनीता लागुरी 'अनु'

34 comments:

  1. सुंदर एवं समसामाजिक भूमिका है अनु जी साथ प्रस्तुति भी बेजोड़।
    जिसके मध्य मेरी रचना को भी स्थान आपने दिया है। एक बात तो है कि मैं इस मामले में भाग्यशाली हूँ कि चर्चामंच से जुड़े आप सभी रचनाकार मेरे जैसे ग़ैर साहित्यकारों को भी प्रोत्साहन देते हैं ।
    जहाँ तक होलिका दहन का प्रश्न है, तो इसमें यह संदेश निहित है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, परंतु अंततः वह प्रह्लाद जैसे बालक की दृढ़ इच्छाशक्ति के समक्ष परास्त हो जाती है । अग्नि पावनता का प्रतीक है और उसमें बुराई टिक नहीं सकती, जीत सदैव अच्छाई की ही होती है ।
    अब इस संदेश को आत्मसात करने की जगह हम हुड़दंग मचाए, किसी को कष्ट दें ,तो इसमें इस परंपरा का क्या कसूर।
    उपवन में भ्रमण करने वाले बुद्ध को बड़े- बड़े मठों में कैद कर दिया जाए अथवा झोपड़ी में रहने वाले साईं बाबा के मस्तक पर स्वर्ण मुकुट रख दिया जाए , तो उनका त्याग अथवा सादगी भरा संदेश झूठा तो नहीं हो सकता न ?

    आपने उचित कहा कि इस बार सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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    1. नमस्कार शशि जी, धन्यवाद देना चाहूंगी आपको कि आपकी प्रतिक्रिया इतनी सरल आती है कि मानो महसूस होता है कि कहीं आमने सामने ही खड़े होकर के बातें कर रहे हैं.. प्रस्तुतियां शामिल हो या ना हो लेकिन आप बिना नागा किए प्रत्येक दिन सर्वप्रथम अपने विचारों के साथ चर्चा मंच में नजर आते हैं..!
      आपकी प्रतिक्रियाओं में भी साहित्य का पुट नजर आता है यूं ही साथ बनाए रखिएगा बहुत-बहुत धन्यवाद आपका

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  2. मुझ जैसे साधारण लोग भी अपने मन के भाव लिख सके । उन्हें भी किसी मंच पर सम्मान मिल सके। इसके लिए गुरु जी के नेतृत्व में आप सभी चर्चाकारों की कृपा हम पर बनी रहे ,ऐसी कामना करता हूँँ,
    क्योंकि साहित्यकारों के लिए तो और भी बड़े-बड़े मंच हैं, पर हम सभी कहाँ जाएंँ,
    कम से कम यहाँँ तो पक्षपात नहीं होता हम लोगों के साथ ।
    पुनः प्रणाम।

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    1. शशि जी साधारण लोगों की कलम ही साधारण सोच रखने वालों के दिलों तक पहुंच पाती है आपमें यह बहुत बड़ी खूबी है कि आप हमेशा सरल शब्दों में अपनी बातें लिख देते हैं जो कि वाकई में बहुत अच्छी होती है
      आपकी बातों का मैं भी समर्थन करती हूं यहां पक्षपात जैसा माहौल नहीं है सभी एक दूसरे को आगे लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं शास्त्री जी एवं हमारी पूरी टीम सिर्फ और सिर्फ साहित्य के विकास पर ही ध्यान देती है बहुत अच्छी लगी आपकी प्रतिक्रिया

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  3. विविधवर्णी रंगों को लिए सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार अनीता लागुरी अनु जी।

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  4. सेल्फी एक्सपर्ट युवक मौत से अपने मिर्ज़ापुर जनपद के जलप्रपातों पर भी खेलते रहते हैं आए दिन हमें यह सूचना मिलती है इलाहाबाद और वाराणसी से जाए कॉलेज के छात्र सेल्फी लेने के दौरान पाँव फिसलने से गिरकर डूब मरे , साथ रही गर्लफ्रेंड को बहादुरी दिखाना उन्हें ख़ासा महंगा पड़ता है।
    एक घटना तो यह भी हुई ट्रेन के साथ सेल्फी लेने के चक्कर में युवक जान गंवा बैठे क्योंकि वह राजधानी एक्सप्रेस थी और उसकी गति के कारण युवक स्वयं को पटरी के समीप संभालना न पाया।

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    1. सत्य कहा आपने शशि जी सेल्फी लेने के चक्कर में अभी तक कितनी सारी मौतें हो चुकी है ज्यादातर मामलों में अपनी प्रेमिकाओं को ही दिखाने के लिए यह सारी चीजें हो रही है बचना चाहिए इन सब चीजों से आज के हमारे युवाओं को लेकिन क्या करें आधुनिकता की दौड़ में युवा ना सिर्फ अंधे हो रहे हैं बल्कि अपनी मर्यादा भी भूलते जा रहे हैं

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  6. आदरणीया दीदी जी सादर प्रणाम 🙏
    सभी पठनीय रचनाओं संग समसामयिक सुंदर भूमिका से सजा आज का अंक और आपकी प्रस्तुति दोनों बेहद उम्दा।
    देश में होली की धूम मची है और इसी बीच कोरोना वायरस का आतंक सब के मन में व्याप्त हो चला है। आपने उचित कहा इससे सावधानी बरतनी है। साथ ही अफ़वाहों से भी बचना है। ज़्यादा भीड़ में ना जाए,जिन्हें आप जानते हो अपने घर परिवार,रिश्तेदारों के साथ ही रंग का यह उत्सव मनाए। साथ ही यह बहुत आवश्यक है कि भगवान ना करें किंतु यदि कोई कोरोना वायरस से जूझ रहा है या ऐसा कुछ संदेह भी है तो वह स्वयं यह प्रयास करें कि वो ज़्यादा भीड़भाड़ में ना जाए और सावधानी बरते जिससे यह किसी और तक ना जाए।
    हम सब यदि साथ मिलकर अपना सामाजिक कर्तव्य निभाते हुए बढ़ेंगे तो इस वायरस से भी विजय प्राप्त कर लेंगे।
    आदरणीया दीदी जी ' एक कोना ' के ज़रिये आपने चर्चा मंच पर एक अभिनव प्रयोग किया है जो वास्तव में सराहनीय है।
    अति किसी चीज़ की अच्छी नही होती और इसके दुष्प्रभाव भोगने पड़ते है। सेल्फी का यह बढ़ता क्रेज भी अपनी अति की ओर जब बढ़ता है तब ऐसे ही अंजाम भोगने पड़ते है।उचित कहा आपने दीदी जी एसी घटनाओं से हमे सीख लेने की आवश्यकता है।
    पुनः प्रणाम 🙏 सुप्रभात।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आंचल... तुम्हारी प्रतिक्रियाएं हमेशा मन को मोह लेती है बहुत अच्छा महसूस होता है जब हम सामने वाले से उसकी बातों के साथ तुरंत जुड़ जाते हैं।
      एक कोना के माध्यम से समसामयिक घटनाओं की एक छोटी सी झलक यहां प्रस्तुत करना चाहती हूँ ताकि साहित्यिक गतिविधियों के साथ हमारा ध्यान इन सब बातों पर भी रहे कि हमारे लिए कभी-कभी छोटी-छोटी गलतियां भी बहुत बड़ी गलती बन जाती है तुमने अपने विचार रखे मुझे बहुत खुशी हुई..।
      धन्यवाद आंचल

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  7. होली के लिए अग्रिम शुभकामनायें, सुंदर भूमिका और पठनीय रचनाओं से सजा है आज का चर्चा मंच !

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    1. अनीता जी आपको भी होली की बहुत ढेर सारी अग्रिम शुभकामनाएं यूं ही आते रहा कीजिएगा अच्छा लगता है आपके आने से धन्यवाद

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  8. सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं बहुत सुंदर प्रस्तुति, मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए आभार आपका...अनीता लागुरी जी :))

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    1. जी धन्यवाद संजय जी आप आए मुझे बेहद खुशी हुई

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  9. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद कविता जी

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  10. शानदार प्रस्तुति दी है आपने अनुजी ।
    भूमिका बहुत महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ उपयोगी सार्थक।
    सभी लिंक आकर्षक, सुंदर संकलन।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया।
    सस्नेह।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद जी आपको आज का संकलन पसंद आया इसकी मुझे बेहद खुशी है आप लिखते ही इतना अच्छा हो कि आपको हर बार जब मेरी प्रस्तुति आने की बारी होती है आपको जरूर ढूंढती हूं आप ऐसे ही लिखा करते रहा कीजिएगा धन्यवाद

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  11. बहुत ही सुंदर भूमिका अनु जी ,सुंदर लिंकों से सजा बेहतरीन चर्चा अंक ," एक कोना " एक सराहनीय प्रयोग हैं ,ऐसे समसमायिक घटनाओं को भी साझा करना बहुत जरुरी हैं। सभी रचनाकाओं को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमस्कार

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    1. . बहुत-बहुत धन्यवाद कामिनी जी.. चर्चामंच में प्रस्तुति आने तक अंदर ही अंदर एक घबराहट होती है यह पता नहीं हमारे पाठक मित्रों का कैसा रिएक्शन आएगा..
      लेकिन जब सभी आकर सराहते हैं तो बहुत दिली खुशी मिलती है अच्छा लगता है..।
      आपको आज का अंक अच्छा लगा इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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  12. बेहद खूबसूरत और विविधताओं से परिपूर्ण अत्यंत सुन्दर प्रस्तुति ।सभी चयनित रचनकारों को हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  13. बहुत-बहुत धन्यवाद मीना जी.. हमेशा साथ बनाए रखिएगा

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  14. होली भारतीय समाज में पवित्र भाईचारे का संदेश प्रेषित करता है। त्योहार का अर्थ ही सामान्य दिनचर्या में खुशी और उमंग के कुछ पल समाहित कर जीवन की जीवंतता महसूस करना है। नकारात्मक और सकारात्मक पक्ष हर विषय में दृष्टिगोचर होते हैं।
    होली और कोरोना पर सारयुक्त संदेशात्मक भूमिका लिखी है आपने अन्नू।
    कुछ रचना ही पढ़ पायें हैं हम जो अबतक बहुत अच्छी लगी।
    बहुत सुंदर प्रस्तुति बनाई है आपने अन्नू।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद श्वेता दी बहुत ही अच्छी लगी आपकी बातें बिल्कुल सही कहा त्यौहार का अर्थ ही है ""सामान्य जीवन में जीवंतता का अनुभव करना ""यह पंक्तियां कहां से ढूंढ के लाई आप बहुत अच्छा लगा पढ़करःः यूं ही हमेशा साथ बनाए रखिएगा धन्यवाद

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  15. बहुत सुंदर प्रस्तुति। बेहतरीन रचनाओं का चयन करते हुए समकालीन विषयों को प्रधानता देते हुए सार्थक चर्चा प्रस्तुत की गयी है। भूमिका में होली के लिये सकारात्मक चर्चा की गयी है साथ ही कोरोना वायरस के प्रति सचेत किया गया है। शुक्रवारीय स्तंभ 'एक कोना' में वर्णित घटना रोंगटे खड़े करने वाली है। सेल्फ़ी की सनक में जीवन को दांव पर लगाना भयंकर भूल है जिसमें कभी-कभी जीवन से हाथ धोना पड़ता है।

    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद रविंद्र जी आपकी प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार था, जी आपको भी होली की अग्रिम शुभकामनाएं ...सेल्फी की सनक में अपनी जान गँवा देने वाले युवाओं की आजकल कमी नहीं है मेरा यही प्रयास है कि इस तरह की बातों को जितना हो सके साझा करके थोड़ा चेतावनी स्वरूप सब को आगाह कर सकूँँ धन्यवाद आपका..।

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  16. शानदार भूमिका के साथ लाजवाब चर्चा मंच....
    सभी उत्कृष्ट रचनाओं के साथ मेरी रचना को स्थान देने हेतु तहेदिल से धन्यवाद आपका ।
    बहुत ही सराहनीय सार्थक और शिक्षाप्रद आपका एक कोना प्रस्तुति को और भी विशिष्टता प्रदान करता है...।
    सस्नेह आभार।

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद सुधा जी आप आई मुझे बहुत अच्छा लगा हमेशा साथ बनाए रखिएगा धन्यवाद

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  17. बहुत ही सुंदर सारगर्भित भूमिका प्रिय अनु. सभी रचनाएँ बहुत ही अच्छी चुनी है आपने. मेरी रचना को स्थान देने हेतु तहे दिल से आभार
    सादर स्नेह

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आपका अनीता जी..!

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  18. Anu ji ,

    स्नेहिल आभार। ...


    बहुत ख़ुशी आपके शब्द पा कर....युहीं स्नेह बनाये रखें और उत्साह बढ़ते रह....रचना को प्यार देने के लिए बहुत आभार, सभी उत्कृष्ट रचनाओं के साथ मेरी रचना को स्थान देने हेतु धन्यवाद

    हुत सुंदर प्रस्तुति। बेहतरीन रचनाओं का चयन ..आपके सयोजन की सबसे प्यारी बात ये होती है की। .कोमल सा स्पर्श होता हैं आपके कार्य में।

    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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  19. वाह प्रिय अनु , बहुत सुंदर अंक | तुम्हारे लेखन की धार भूमिका में नजर आती है | यूँ ही आगे बढती रहो | मेरी शुभकामनाएं|

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  20. Do you realize there's a 12 word phrase you can tell your partner... that will trigger deep emotions of love and impulsive attraction to you buried within his heart?

    That's because deep inside these 12 words is a "secret signal" that fuels a man's instinct to love, worship and protect you with all his heart...

    12 Words That Trigger A Man's Desire Instinct

    This instinct is so hardwired into a man's brain that it will drive him to try better than ever before to take care of you.

    In fact, fueling this all-powerful instinct is so essential to having the best possible relationship with your man that once you send your man a "Secret Signal"...

    ...You'll soon notice him open his mind and heart for you in a way he haven't expressed before and he'll identify you as the one and only woman in the world who has ever truly understood him.

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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