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Monday, March 23, 2020

"घोर संक्रमित काल" ( चर्चा अंक -3649)

सादर अभिवादन 
ब्लॉगों के संक्रमणकाल में 
दूसरों के ब्लॉगों पर भी 
अपनी टिप्पणी दिया करो।
कोरोना वायरस ने देश में भी हाहाकार मचा दिया है, लेकिन इससे बचाव ही उपाय है। इसलिए जानिए कि क्या सावधानियां बरतें और इसके क्या लक्षण हो सकते हैं।
एनएचएस की सलाह के मुताबिक़, अपने हाथ अच्छी तरह धोएं. खांसते या छींकते वक़्त अपना मुंह ढक लें और हाथ साफ़ न हों तो आंखों, नाक और मुंह को छूने बचें। इस तरह के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि कोरोना वायरस पार्सल, चिट्टियों या खाने के ज़रिए फैलता है. कोरोना वायरस जैसे वायरस शरीर के बाहर बहुत ज़्यादा समय तक ज़िंदा नहीं रह सकते।
जनता कर्फ्यू के बीच उत्तराखंड से बड़ी खबर सामने आई है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आगामी 31 मार्च तक प्रदेश में लॉ़क डाउन घोषित कर  दिया है। पुलिस विभाग और अन्य अधिकारियों की आपात बैठक कर उन्होंने ये फैसला लिया। उनका कहना है  कि आपात सेवाएं और खाद्य आपूर्ति सुचारू रहेंगी। 
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जिस तरह से प्रदेश की जनता ने पीएम की अपील को माना और उस पर अमल किया उससे मुझे यकीन है कि हम कोरोना वायरस से पूरी तरह से लड़ सकते हैं। डॉक्टर, कर्मचारी, व्यापारी, नगर निगम ने इसमें पूरा योगदान दिया है। हमें आने वाले समय के लिए तैयार रहना चाहिए। जनता को किसी भी तरह के जरूरी सामान की कोई किल्लत नहीं होगी। 
उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस चुनौती से लड़ने के लिए सबके सहयोग की जरूरत है। आप बिल्कुल न घबराएं। सरकार सभी जरूरी सेवाएं जैसे कि स्वास्थ्य, सफाई , राशन, सब्जियां, फल, पेट्रोल, डीजल आदि महत्वपूर्ण आदि सुचारु रूप से उपलब्ध करवा रही है। अफवाहों पर ध्यान न दें। केवल सरकार की हिदायतों को समझें।


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शब्दसृजन-14 का विषय है- 
"मानवता" 
आप इस विषय पर अपनी रचना  
आगामी शनिवार (सायं 5 बजे तक ) तक  
चर्चामंच के ब्लॉगर संपर्क (Contact  Form ) के ज़रिये भेज सकते हैं 
चयनित रचनाएँ आगामी रविवासरीय चर्चा अंक में प्रकाशित की जायेंगीं।
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अब देखिए सोमवार की चर्चा में  
मेरी पसन्द के कुछ लिंक... 
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कोरोना को हराना है,  

भारत से भगाना है।  

जनता कर्फ़्यू जारी है। 

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जनता कर्फ्यू निभाना है 

बलबीर सिंह राणा 'अडिग ' 
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करोना वायरस का भारत में निकलेगा दम 

करोना वायरस का भारत में निकलेगा दम  
चौदह घण्टों की अवधि में ही हो जाएगा खत्म .. 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi  
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सुबह सुबह 

बड़ी खूबसूरत सुबह ! सुबह के 8:50 हो चुके है, सुरज धीमे धीमे से चढ़ा जा रहा है। मेरे ड्रॉईंग रुम में शांति से धूप पसरी पड़ी है। खिड़कियां आज बेखौफ खुली है सभी कमरों की, क्योकि होर्न और आवाजाही का शोरगुल नहीं है ... 
आत्ममुग्धा 
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न्याय 

Sudhinama पर Sadhana Vaid  
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बेटियां 

 पेड़ पर पड़े झूले-सी,  
पत्तों में फुदकती चिड़िया-सी,  
फूलों में उडती तितली-सी,  
बारिश की फुहार-सी,  
जाड़ों की धूप-सी,  
बस ऐसी ही होती हैं बेटियां... 
कविताएँ पर Onkar 
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इतनी बड़ी सज़ा 

शहर की उस तंग गली में सुबह से ही तवायफ़ों के ऊपर तेजाब फेंके जाने से कोहराम मचा था। मौके पर तमाशाई जुटे हुये थे। कुछ उदारमना लोग यह हृदयविदारक दृश्य देख -- " हरे राम- हरे राम ! कैसा निर्दयी इंसान था.. ! सिर्फ़ इतना कह कन्नी काट ले रहे थे। " एक दरिंदा जो इसी इलाके का हिस्ट्रीशीटर था। उसने इन चारों में से सबसे ख़ूबसूरत तवायफ़ को हिदायत दे रखी थी कि वह सिर्फ़ उसकी है। जिसके प्रतिउत्तर में तवायफ़ ने इतना ही कहा था-- उनके धंधे में सारे ग्राहक एक जैसे हैं और वे अपने सौदे में मिलावट नहीं किया करती हैं ... 
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Corona Virus / कोरोना वायरस 

कोरोना वायरस क्या है? इसकी उत्पत्ति कहाँ और कैसे हुई?* *कोरोनावायरस* (Coronavirus) कई वायरसो का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। यह आरएनए वायरस होते हैं। मानवों में यह श्वास तंत्र संक्रमण के कारण होते हैं, जो कभी-कभी जानलेवा होते हैं।गाय और सूअर में यह अतिसार और मुर्गियों में यह ऊपरी श्वास तंत्र के रोग के कारण बनते हैं। इनकी रोकथाम के लिए कोई टीका (वैक्सीन) या वायररोधी (antiviral) अभी उपलब्ध नहीं है और उपचार के लिए प्राणी की अपने प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है ताकि संक्रमण से लड़ते हुए शरीर की शक्ति बनी रहे... 
Mere Man Kee पर Rishabh Shukla  
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कोविड-19 - कुंडलियाँ 

इक व्याधि ऐसी पसरी,कोविड जिसका नाम  
त्राहि त्राहि जनता करे, हमें बचाओ राम... 
~Sudha Singh 
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आद. रवीन्द्र सिंह यादव की अनुपस्थिति में 
आज का सफर यहीं तक...!
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12 comments:

  1. कोरोना वायरस देशभर में हाहाकार मचा दी है इसका उपाय सिर्फ यही है सावधानी बरतें और घरों में रहे और बाहर जाने से बचे सिर्फ़ जरूरी काम होने पर ही बाहर निकले।


    बहुत ही सुंदर आज की चर्चा मंच

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  2. समसामयिक भूमिका और सुंदर प्रस्तुति। इसी से सम्बंधित एवं अन्य रचनाओं के मध्य मेरे सृजन इतनी बड़ी सजा को स्थान देने के लिए आभार।

    यह एक सत्यकथा है।

    मुझे लगा एक और दुर्भाग्य के कारण तवायफ़ बनीं वे लड़कियाँ जो अपने ज़िस्म के सौदे में ग्राहकों संग कोई मिलावट नहीं करती हैं और दूसरी ओर दोहरे चरित्र वाले भद्रजन.. अतः इस पर लिखा जाए।

    आपने समाज के इस मिलावट को प्रदर्शित कर रही मेरी रचना को मंच स्थान दिया। इसके लिए आभारी हूँ गुरुजी।

    अन्यथा तो रचना चयन में भी मिलावट का युग है।

    कोरोना वायरस को लेकर जहाँ विश्वव्यापी भय का वातावरण है। वहीं अभी भी कुछ लोग ऐसे है कि इसे राजनीति के चश्मे से देख रहे हैं।
    परंतु हमें रह नहीं भूलना चाहिए कि भारत जैसे विकासशील देश में इतने संसाधन नहीं है जितने विकसित देश में ,अतः सरकार हमें जो भी दिशा निर्देश दे रही है ,उसका सावधानीपूर्वक ईमानदारी के साथ के पालन करना चाहिए।

    इन्हीं शब्दों के साथ सभी रचनाकारों को प्रणाम

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  3. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  4. सुंदर चर्चा. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार|
    सुन्दर संकलन और कोरोना सम्बंधी उपयोगी जानकारी....

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  7. सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज की चर्चा ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हृदय से धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  8. देश पर आन पड़ी इस घोर विपदा की संकट की घडी में सभी स्वस्थ व सुरक्षित रहें, तथा यथासंभव दूसरों का भी ख्याल रखें !

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  9. आपने उचित सलाह दी हैं सर ,सतर्कता और सावधानी ही हमें इस बिपदा से निकल सकती हैं ,बेहतरीन चर्चा अंक ,सभी रचनाकारों को ढेरों शुभकामनाएं ,सादर नमन आपको

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  10. समसामयिक रचनाओं से सजी सुन्दर प्रस्तुति । सभी सजग रहें, स्वस्थ रहें.. सभी रचनकारों को हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  11. सुंदर समसामयिक भूमिका के साथ बेहतरीन प्रस्तुति आदरणीय सर.मेरी रचना को स्थान देने हेतु सहृदय आभार आदरणीय
    सादर प्रणाम

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  12. बहुत खूब आदरणीय सर | कोरोना और जनता कर्फ्यू कर सार्थक भूमिका
    के साथ बहुत बढ़िया चर्चा अंक | और ये मन्त्र तो सनातन धर्म का अमर उद्घोष है --
    इसे अपनाने में लाभ ही लाभ , नुक्सान एक भी नहीं |---------
    खाना अब तो छोड़ दो, मछली गोश्त-कबाब।
    घर से निकलो जब कभी, मुँह पर ढको नकाब।
    सार्थक अंक के लिए आपको सादर आभार और शुभकामनाएं | सभी रचनाकारों को नमन | सादर

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