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Sunday, March 28, 2021

"देख तमाशा होली का" (चर्चा अंक-4019)

 मित्रों!
आप सबको रंगों के महापर्व 
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

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होलीगीत "फागुन की रंगोली का" 
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मस्त फुहारें लेकर आया,

मौसम हँसी-ठिठोली का।

देख तमाशा होली का।।

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उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,

हुआ है धरती-अम्बर लाल,

भरे गुझिया-मठरी के थाल,

चमकते रंग-बिरंगे गाल,

गोप-गोपियाँ खेल रहे हैं,

खेला आँख-मिचौली का।

देख तमाशा होली का।।

मस्त फुहारें लेकर आया,

मौसम हँसी-ठिठोली का।

देख तमाशा होली का।।

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दोहे "विश्व रंग मंच दिवस" 
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रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।
नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।
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विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।
विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।
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आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।
रंग-मंच के क्षेत्र में, चलता खूब प्रपञ्च।।
उच्चारण  
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होली में 

उसने मुझे सूखा रंग लगाया,

पर भीग गया मैं अंदर तक. 

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आज की होली 

होली के रंगों  में वह मजा नहीं

जो आता है मिलने मिलाने में

गिले शिकवे दूर कर  

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सप्तरंगी स्पर्श 
उन्मुक्त ह्रदय में है
मन्नतों का वृन्दावन, 
दुःख हो या सुख, वो खेले होली आजीवन,
देह प्राण रंग जाए बार बार 
शांतनु सान्याल, अग्निशिखा : 
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पुस्तकें 
ज्ञान का भंडार होतीं पुस्तकें
मन का हैं श्रृंगार होतीं  पुस्तकें

रूढ़ियों और बंदिशों की गांठ को
खोलने का द्वार होतीं पुस्तकें
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चल, होली है, पागल! 
यूँ छेड़ न तू, तन्हा सा गजल.....

नेह लिए प्राणों मे, दर्द लिए तानों में,
सहरा में, या विरानों में,
रंग लिए पैमानों में, फैला ले जरा आँचल, 
चल, होली है, पागल! 
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा, 
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सुलग रही है विधवा ... 

गहनों से सजानी थी उसे जो अगर अपनी दुकानें,

तो खरा सोना पास अपने यूँ भला रखता क्योंकर?

सकारे ही तोड़े गए सारे फूल, चंद पत्थरों के लिए,

बाग़ीचा सारा, सारा दिन यूँ भला महकता क्योंकर? 

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बदहाल ऋषिकेश 
प्रकृति की गोद में, पहाड़ों से घिरे, गंगा किनारे वनाच्छादित, शांत-स्वच्छ परिवेश की छवि की कल्पना को जैसे ही सड़क पर टंगे दिशानिर्देशक बोर्ड ने, ''ऋषिकेश में स्वागत है'' की सुचना दी तो वहां की हालत देख ऐसा लगा जैसे किसी ने मधुर स्वप्न दिखाती नींद से उठा वास्तविकता की पथरीली सड़क पर पटक दिया हो ! वही किसी आम कस्बे की तरह धूल भरी उबड़-खाबड़ संकरी सड़कें, पहाड़ी से नीचे आते सूखे जलपथ ! उनमें बढ़ता कूड़ा-कर्कट ! लुप्तप्राय हरियाली, भीड़-भड़क्का, शोरगुल, गंदगी का आलम ! मन उचाट सा हो गया... 
गगन शर्मा,  कुछ अलग सा  
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इस जंगल में अब कोई पेड़ नहीं है 

इस जंगल में

अब कोई पेड़ नहीं है

केवल हैं

ऐसे ही

उलझे से

जीवन के चित्र। 

SANDEEP KUMAR SHARMA, पुरवाई  
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कोविद की वापिसी 

रहा कोरी  कल्पना

कोविद की वापिसी

हुई जब  से  

बिना रंग  गुलाल

फीका त्यौहार

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क्या पढूं...? 
याद होगा आपको क्या लिखूं नि:बंध पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी साहब बड़े विचार मग्न थे, और इसी विचार प्रवाह में डूब कर बक्शी जी ने लिख मारा एक निबंध ! निबंध क्या सच्चाई थी। लिखने के बाद टोपी टांगने की समस्या खूंटी खोजना भी उनकी है समस्या थी ना । उन्हें लिखने की समस्या थी मुझे पढ़ने की समस्या है 
गिरीश बिल्लोरे मुकुल, साझेदारी The Partnership 
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एक ग़ज़ल होली पर 

न उतरे ज़िन्दगी भर जोलगा दो रंग होली में,

हँसीं दुनिया नज़र आए , पिला दो भंग होली में ।         

न उतरी  है न उतरेगीतुम्हारे प्यार की रंगत,

वही इक रंग सच्चा हैन हो बदरंग  होली में । 

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आनन्द पाठक, आपका ब्लॉग 
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सखियों की चौपाल (होलियाना) 

पति पत्नी दोनों सोशल मीडिया में सक्रिय हो तो आपस में झगड़ा कम होता है. दोनों उसी में लगे रहते हैं. लड़ना झगड़ना भी वहीं चलता रहता है.

मेरे पति का क्या करूँ. वो तो फेसबूक,  वाट्सएप ज्यादा चलाते ही नहीं. सरसरी नजर से देखकर रह जाते हैं. रिटायर होने के बाद घर में ही रहना पड़ता है तो सारा झगड़ा आमने सामने ही होता रहता है.

ऐसा करो. उनका  वाट्सएप नंबर अपनी सखियों वाले ग्रुप में अपडेट कर दो. फिर देखना . उसी में व्यस्त रहेंगे . तो लड़ना झगड़ना भी नहीं होगा .

ना रे. . वो तो मेरी सखियों को आँख उठा कर भी नहीं देखते. सामने हो तो आँखें नीची कर साइड से निकल जाते हैं.

तो फिर समस्या तुम्हारा पति नहीं, सखियाँ हैं.उन्हें ही बदल डालो 😂 

वाणी गीत, ज्ञानवाणी 
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हवलदार बहादुर और कमीश्नर का कुत्ता 

इंस्पेक्टर खड़गसिंह को एक गुमनाम व्यक्ति ने टेलीफोन कॉल करके जब एक ऐसी जगह के विषय में बताया जहाँ पर तस्करों ने ड्रग्स छुपा रखी थी तो वह हवलदार बहादुर के साथ इस बात को जाँचने वहाँ पहुँच गया। लेकिन इसके बाद वहाँ परिस्थितियाँ ऐसी बन गयी कि खड़गसिंह को अस्पताल जाना पड़ा और मामले की तहकीक्त करते इंस्पेक्टर त्यागी ने हवलदार को इस मामले से दूरी बनाने की नसीहत दे दी। 

वहीं उसी वक्त कमीश्नर का कुत्ता कहीं खो गया और उन्होंने हवलदार बहादुर को उसकी तलाश में लगा दिया। अब हवलदार कुत्ते की तलाश कर कमीश्नर को खुश करना चाहता था। 

विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल  
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चाँद ! मेरे पंजे में आ जा... 

ऐ चाँद! मेरे पंजे में आ जा,

मेरी मुट्ठी में समा जा।

तू मुझ में अपना आलोक बसा जा!

ऐ चाँद! मेरे पंजे में आ जा! 

आनन्द वर्धन ओझा, मुक्ताकाश....
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अब समेटें धार मन की 

खेलता है रास कान्हा 

आज भी राधा के संग,  

प्रीत की पिचकारियों से 

डाल रहा रात-दिन रंग !

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चांदी के वर्क से व्यंजनों की खूबसूरत सजावट: डॉक्टर कृपा शंकर माथुर 
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के भूतपूर्व सदस्य एवं लखनऊ विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान विभाग के भूतपूर्व अध्यक्ष डॉक्टर कृपा शंकर माथुर साहब मेरे पिता जी के मामा जी थे और उनका विशेष स्नेह सदा ही पिता जी पर रहा। 48 वर्ष की आयु में 21 सितंबर 1977 को उनके निधन का समाचार एवं चांदी के वर्क पर आधारित उनकी लेखमाला (जो अपूर्ण रह गई) का क्रमिक भाग 22 सितंबर 1977 के नवजीवन में प्रकाशित हुआ था, 
यशवन्त माथुर जो मेरा मन कहे  
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आज के लिए बस इतना ही।
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16 comments:

  1. यह जानकर बहुत ही अच्छा लग रहा कि ब्लॉग लगातार लिखे जा रहे हैं. ब्लॉग्स की जानकारी देने व संग्रह में शामिल करने का आपका बहुत आभार!

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  2. होली के अवसर पर विविधतापूर्ण प्रस्तुति अत्यंत ही सुखद व शुभ संकेत है। समस्तजनो को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ व आदरणीय मयंक सर के अथक प्रयासों को शत्-शत् नमन।

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  3. सभी को रंगोत्सव की असंख्य शुभकामनाएँ, दूर से ही रंग अबीर उड़ाएं - - सभी रचनाएं अपने आप में हैं अतुलनीय, मुझे जगह देने हेतु असीम आभार आदरणीय शास्त्री जी।

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  4. आदरणीय शास्त्री जी,
    आपको भी रंगों के महापर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏
    लिंक्स का खजाना ले कर आती है आप द्वारा संयोजित एव संकलित चर्चा....
    मेरी पोस्ट को इसमें शामिल कर मान देने के लिए हृदयतल की गहराइयों से आभार 🙏

    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  5. चर्चा मंच के सभी सुधी जनों को रंगों के महापर्व
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏

    यथोचित अभिवादन सहित,
    शुभाकांंक्षिणी,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  6. एक से बढ़कर एक रचनाओं के सूत्र से सजा चर्चा मंच ! आभार मुझे भी इसमें शामिल करने हेतु, होली की शुभकामनाएं !

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  7. होली की शुभकामनाओं के साथ बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

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  8. रोचक लिंक्स से सुसज्ज्ति चर्चा... मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार....

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  9. आदरणीय शास्त्री जी, नमस्कार । सुन्दर रोचक,तथा रंग बिरंगे सूत्रों से सजी चर्चा प्रस्तुति के लिए आपका बहुत बहुत आभार ।मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करती हु,आपको तथा सभी रचनाकारों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाई ।

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  10. सुंदर अंक। आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  11. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति, होली की हार्दिक शुभकामनाएं

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  12. आभारी हूँ... सभी लिंक शानदार हैं...। सभी को खूब बधाई...। होली की शुभकामनाएं...। आभार आदरणीय शास्त्री जी...।

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  13. अनेक रंग के भावों से सजी रचनाएँ बहुत सुन्दर हैं। हमारी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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  14. सभी लिंक सुन्दर सार्थक, हमारी कृति को भी शामिल करने के लिए आभार !!

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  15. आदरणीय होली की हार्दिक शुभकामनाएं
    आपकी सृजनशीलता अद्भुत है

    बहुत सुंदर लिंक संयोजन

    सभी रचनाकारों को बधाई

    मुझे सम्मलित करने का आभार
    सादर

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  16. आदरणीय शास्त्री जी सर्वप्रथम तो आपको होली की हार्दिक शुभकामनाएं और चर्चा मंच से जुड़े हुए उन तमाम मेंबर्स को भी होली की हार्दिक शुभकामनाएं

    मेरी पोस्ट को यहां स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार

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