Followers

Tuesday, March 02, 2021

"बहुत कठिन है राह" (चर्चा अंक-3993)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक आदरणीय शास्त्री सर की रचना से )

आज बिना किसी भूमिका के चलते हैं, आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....

------------------

 दोहे  

"बहुत कठिन है राह" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

मन को बहुत लुभा रहेये उपवन के फूल।
कितने प्यार-दुलार सेसुमन पालते शूल।७।
--
गंगा जी में बह रहानिर्मल-पावन नीर।
काँवड़ लेने जायेंगेअब बहनों के बीर।८।

----------------

हाँ, डायन होतीं हैं ! 

  ”डायन होतीं हैं। हाँ, धरती पर ही होतीं हैं। अब बस उनके बदन से बदबू नहीं आती। बदसूरत चेहरा ख़ूबसूरत हो गया और न ही उनके होठों पर अब लहू लगा होता है। दाँत टूट चुके हैं। देखो! उनके नाख़ुँन घिस गए।  तुम्हें पता है, पता है न, बोलो! अरे बोलो न!! तुमने भी देखा है उसे ...?”-----------------------

सुन जोगन !--- कविता  [ Hindi poem] 

सुन जोगन हुए किसके जोगी ?
ये व्यर्थ लगन मत मन कर रोगी !

पग जोगी के काल का फेरा 
एक जगह कहाँ उसका डेरा ?

तोड़ो ये भ्रम

अपनों से, नाते तोड़ कर,
खुद, तुम ही गए, सब छोड़ कर,
मुँह, मोड़ कर,
अंजान पथ,
अब सामने है, गहरी सी खाई,
पीछे, बस एक परछाईं,
ये दुनियाँ पराई!
------------------------------------
सूखे तालाब की व्यथा (प्रदूषण)

गहरा अगाध,अपार हूँ मैं 
असीमित विस्तार हूँ मैं
पुराना, बूढ़ा तालाब 
अपने गाँव का पहरेदार हूँ मैं 
----------------------------------

दुल्हन के मनोभाव

 फिर विदा हो एक दुल्हन 

व्योम को निज हाथ में धर 

रोम में  पुलकन मचलती 

लो चली नयना सपन भर 

प्रीत की रचती हथेली 

गूँज शहनाई हृदय में।। 

---------------------

 हर रोज तो सुबह सात बजे स्कूल के लिए निकलना होता है। बेटे और पति का लंचबॉक्स, दूध गरम करना, चाय बनाना, पौधों को पानी देना, सुबह के अपने रोजमर्रा के काम करना इन सबके लिए सुबह पाँच बजे उठो तो भी उसे वक्त कम पड़ता है। फिर छोटे-छोटे कामों की तो गिनती ही नहीं जैसे अपनी पानी की बोतल, चाय का थर्मस, नाश्ते का टिफिन तैयार करना, पूजा करना आदि
---------------------



विरासत में पिता से मिली कलम, वंदना अवस्थी ने उसे सम्मान से संजोया ही नहीं, ज़िन्दगी के कई सकरी गलियों में घुमाया, कहीं रुदन भरा,कहीं हास्य,कहीं घुटन,कहीं विरोध और अपनी खास दिनचर्या में इसकी खासियत को बड़े जतन से शामिल किया । "बातों वाली गली" से गुजरकर, आज अटकन चटकन की गलियां हैं, -------------------------किसी महीने बरसात कम होती  किसी महीने बकवास कम होती
करते करते
बकवास निरन्तर
सुजान हो चले जड़मति
ये भी तो किस्मत है होती
-----------------------

जब से भारतीय गणतन्त्र का संविधान लागू हुआ हैहमारे संवैधानिक प्रमुख को हिन्दी भाषा में 'राष्ट्रपतिके नाम से ही संबोधित किया जाता रहा है । समाचार-पत्र हों या साप्ताहिक अथवा पाक्षिक अथवा मासिक पत्रिकाएंसभी में 'राष्ट्रपतिशब्द ही छपा हुआ मिलता है । समाचार-वादक चाहे आकाशवाणी के हों या दूरदर्शन अथवा अन्य चैनलों केवे भारत के संवैधानिक-प्रमुख का उल्लेख 'राष्ट्रपतिकहकर ही करते हैं -------------चिट्ठियों की लुप्त होती परम्परा को जीवंत करने का एक सार्थक प्रयास Write a Letter Appreciation Week (01-07 March 2021)

 बच्चों, Write a Letter Appreciation Week 
इस वर्ष एक मार्च से सात मार्च तक मनाया जाएगा। 
वर्ष 2011 से दुनियाभर में इसका चलन लोकप्रिय होने लगा। सोशल मीडिया और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (एसएमएस, ई-मेल्स आदि) के चलते हस्तलिखित पत्रों का 
उपयोग कम होने लगा है। 
इसी को देखते हुए लोगों ने 
हाथ से चिट्ठी लिखने की परंपरा को प्रोत्साहित 
करने के लिए 
Letter Appreciation Week 
का आयोजन शुरू किया। 
---------------------------

आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दें। 
आप सभी स्वस्थ रहें,सुरक्षित रहें। 
कामिनी सिन्हा 
--

12 comments:

  1. मैम, मेरे लिंक को सम्मिलित करने के लिए आपका हार्दिक आभार, ब्लॉगिंग का जमाना बना रहे

    सादर

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात !
    प्रिय कामिनी जी, आज के खूबसूरत रोचक चर्चा अंक के लिए हार्दिक बधाई एवम आभार ..मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हार्दिक हृदय से धन्यवाद एवम अभिनंदन करती हूं..सादर जिज्ञासा सिंह ..

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. सुन्दर और सार्थक चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीया कामिनी सिन्हा जी।

    ReplyDelete
  5. सुन्दर सराहनीय प्रस्तुति कामिनी दी।
    मेरी लघुकथा को स्थान देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।
    सादर

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर और सराहनीय प्रस्तुति कामिनी जी । सभी सूत्र अत्यंत सुन्दर ।

    ReplyDelete
  7. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति ,सभी लिंक बहुत सुंदर, उपयोगी जानकारी और काव्य रस छलकते सुंदर लिंक।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय से आभार आपका कामिनी जी।
    सस्नेह।

    ReplyDelete
  9. अलग -अलग सुंदर रचनाओं से सजा अंक सखी। बहुत -बहुत आभार मेरी रचना को भी इस सुंदर प्रस्तुति का हिस्सा बनाने के लिए। सभी रचनाकारों को सादर, सस्नेह शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  10. आप सभी को हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर नमस्कार

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।