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Saturday, January 02, 2021

'जीवन को चलना ही है' (चर्चा अंक- 3934)

 शीर्षक पंक्ति: आदरणीय यशवन्त माथुर जी की रचना से। 


सादर अभिवादन। 
शनिवासरीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।

इतना कुछ था दुनिया में
लड़ने-झगड़ने को
पर ऐसा मन मिला
कि ज़रा-से प्यार में डूबा रहा
और जीवन बीत गया..|

-कुँवर नारायण

जीवन एक जीता-जागता यथार्थ है जो जीव की जिजीविषा के रूप में कालांतर में महिमामंडित होता है। जीवन एक तलाश है जो मृत्यु तक सफ़र करती है और परिणाम के रूप में अनेक रचनात्मक उपलब्धियाँ दुनिया को सौंप जाता है। 

जीवन एक चक्रव्यूह है जिसका मृत्यु से अनवरत युद्ध चलता रहता है।  जीवन के साथ जुड़ी नश्वरता, अचिरता उसे अनमोल बनाती है ताकि जीवन रहते अविस्मरणीय लक्ष्य परिपूर्ण किए जाना संभव हो सकें अतः जीवन की अनिश्चितता उसकी महान ख़ूबसूरती है यदि सकारात्मक भाव के साथ विचार संभव हो। 

-अनीता सैनी 'दीप्ति'

आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ- 

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"सबको मुबारक नया वर्ष हो" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आशाएँ सरसती हैं मन में
खुशियाँ बरसेंगी आँगन में
सुधरेंगें बिगड़े हुए हाल। 
आया है फिर से नया साल।।

--

जीवन को चलना ही है


अंधेरा कितना भी हो 
उजियारा होना ही है 
सुई रुक भी जाए 
घड़ी को बदलना ही है। 

कहीं ढलती शाम होगी 
इस समय 
कहीं सूरज को किसी ओट से 
उगना ही है। 
--
हर साल आता है साल नया 
हर पुराने साल को करने विदा 
हर गुज़रे साल से सीखते नया 
मगर होता तो नहीं कुछ भी नया 
ये साल बहुत कुछ हमें सीखा गया 
क्या चाहिए और कितना बता गया
--
न जाने कितनी भावनाऐं , भीतर-भीतर ही
उमड़-घुमड़ कर , बरस जाती हैं
जब तक हम समझते , तब तक
शब्दों के छतरियों के बिना ही
हमें भींगते हुए छोड़कर , बह जाती है
आओ ! मिलकर हम
--
फूल खिले तो बिखरे ख़ुशबू
बिना किसी भी बंधन के,
रहे न दिल में कभी निराशा
उम्मीदों का डेरा हो ।
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इंतज़ार ख़त्म होने को है 
21वीं सदी को इक्कीसवें
 साल की शुभकामनाएं देने
 जनवरी सीढ़ी 
दर सीढ़ी उतर रही है ...
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हमें तो उस परछाई से मोहब्बत हो गयी I
वहम जिसका दिल में लिए हुए जिन्दा थे II

अजनबी सी चाहत थी यह या कुछ और I
जो भी थी कशिश यह थी दिल की और II
--
जीवनोत्सव रुकता नहीं, केवल
बुझ जाते हैं, देह से लिपटे
हुए रंग मशाल, इस
अस्ताचल से
आगामी
डूब
तक कोई नहीं होता राख के पास।
समय बना देता है बेहद दुरूह
विगत सभी स्मृति को,
उत्तरोत्तर लोग
भुला देते हैं,
रेत में
दबे
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जश्न तो मनाना है 
नये साल को बुलाना है
जो दुःख दिये बीते साल ने
सिरे से उन्हें भुलाना है !
आने वाला साल
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धरती माँ ने सही
असह्य वेदना
जन्मा कोरोना
कभी रफ़्तार होती थी
मायने ज़िंदगी की
थम गई दुनिया
एक ही पल में
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हमने तो दोस्ती में जान देना सीखा है और वह भी बिना कहे बिना अहसान , अहसास दिलाये , ऐसे लोग हमें नहीं मिले ! खैर अब आगे दोस्ती ही नहीं करना सिर्फ हेलो कैसे हैं , से आगे नहीं जाना, यही संकल्प है अगले कुछ दिन या वर्षों के लिए , जो भी हाथ में हों ! 
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प्रणब मुखर्जी ने अपनी तथाकथित स्मृतियों में जो दावा किया है कि उनकी महत्वाकांक्षा कभी भारत का प्रधानमंत्री बनने की नहीं थीउससे बड़ा असत्य और कुछ नहीं । दादा धरती और
जनसामान्य से जुड़े हुए नेता चाहे कभी नहीं रहे लेकिन अपनी प्रशासनिक
दक्षताकार्यकुशलता और मृदु व्यवहार के चलते वे शीघ्र ही श्रीमती इन्दिरा गांधी के विश्वासपात्र बन बैठे थे जिससे अल्पायु में ही न केवल उनको वित्त और रक्षा जैसे अतिमहत्वपूर्ण मंत्रालयों के प्रमुख बनने का अवसर मिल गया था  बल्कि संजय गांधी के असामयिक देहावसान के उपरांत उनका राजनीतिक कद इतनी शीघ्रता से बढ़ा था कि वे केंद्रीय मंत्रिपरिषद में दूसरे नंबर पर समझे जाने लगे थे । इस आनन-फानन तरक्की ने ही दादा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पर लगा दिए और ३१ अक्तूबर१९८४ को इन्दिरा जी के स्तब्धकारी निधन के साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री का पद अपनी ओर आता दिखाई देने लगा । अपनी इस अधीरता में दादा भूल बैठे कि चाय की प्याली और पीने वाले के होठों के मध्य का अंतर लगता छोटा है लेकिन होता बहुत बड़ा है ।
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16 comments:

  1. नये साल की सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार अनीता सैनी दीप्ति जी।

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  2. प्रिय अनीता जी,
    'जीवन को चलना ही है' यशवन्त माथुर जी की यह पंक्ति इस पूरी चर्चा पर वास्तव में सटीक बैठ रही है। बहुत अच्छा संयोजन है आपका, बधाई 💐🙏🏻💐

    नववर्ष मंगलमय हो।
    मेरी पोस्ट को शामिल करने हेतु हार्दिक आभार 🙏🏻🌷🙏🏻
    -डॉ. वर्षा सिंह

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  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. आज इस संकलन में अपूर्व भाव- दशाओं का सुन्दर सूत्रों में पिरोने के लिए आपका बहुत बहुत आभार । उद्धृत भूमिका सार- निचोड़ है ही । हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  5. जीवन का सार समझती सुंदर भूमिका के साथ बेहतरीन लिंकों का चयन प्रिय अनीता जी,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं

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  6. शीर्षक में स्थान देने के लिये विशेष धन्यवाद अनीता जी।
    🙏नववर्ष 2021 आपको सपरिवार शुभऔर मंगलमय हो 🙏

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  7. बहुत सुंदर चर्चा।

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  8. सुंदर सार्थक भूमिका के साथ बहुत बढ़िया लिंक संयोजन ... शुभकामनायें

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  9. आज की चर्चा के सभी लिंक्स बहुत सुन्दर ! सभी मित्रों, बंधु बांधवों एवं पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ! आज की चर्चा में मेरी रचना को स्थान दिया आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! सप्रेम वन्दे !

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  10. सभी रचनाएँ असाधारण सौंदर्य से भरे हुए, चर्चा मंत्र मुग्ध करता हुआ, मुझे शामिल करने हेतु ह्रदय तल से आभार, आदरणीया अनीता जी - - नमन सह। सभी को नूतन वर्ष की असीम शुभकामनाएं।

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  11. बेहतरीन संकलन खूबसूरत रचनाओं का , बधाई एवं मंगलकामनाएं आपको !

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  12. बेहतरीन सूत्रों से सुसज्जित लाजवाब चर्चा प्रस्तुति ।

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  13. एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट रचनाओं का संकलन ।
    आप सभी को नववर्ष की अशेष शुभकामनाएंँ एवं बधाई ।
    सादर।

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  14. प्रिय अनीता जी
    संकलन में शामिल करने के लिए आपका बेहद शुक्रिया !
    अन्य रचनाओं को पढ़ने का ये अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद!
    आपको नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !
    आभार !

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  15. आदरणीया अनीता जी
    संकलन में मेरे आलेख को सम्मिलित करने के लिए हृदयतल से आपका आभार । आपका चयन उच्च कोटि का है । सभी चयनित रचनाएं उत्तम हैं ।

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  16. अत्यंत सुन्दर संयोजन... मेरी रचना को यथोचित स्थान देने के लिये हृदय से आभार... 'पूरे चर्चा मंच परिवार' के लिये नव-वर्ष अत्यंत मंगलमय हो...।

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