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Sunday, January 10, 2021

♦बगिया भरी बबूलों से♦ (चर्चा अंक-3942)

 मित्रों।
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
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आज की चर्चा का प्रारम्भ 
आदरणीया डॉ. वर्षा सिंह जी की  
ग़ज़ल की इस पंक्ति से-
बगिया भरी बबूलों से
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देशभक्ति गीत  ♦मैं तिरंगे को झुकने न दूँगा कहीं♦  

मेरे प्यारे वतनजग से न्यारे वतन।
मेरे प्यारे वतनऐ दुलारे वतन।।
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अपने पावों को रुकने न दूँगा कहीं,
मैं तिरंगे को झुकने न दूँगा कहीं,
तुझपे कुर्बान कर दूँगा मैं जानो तन।
मेरे प्यारे वतनऐ दुलारे वतन।।

उच्चारण  --

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पुराने कपड़े |  कहानी |  डॉ. (सुश्री) शरद सिंह 
'अब आप कहीं नहीं जाओगीदादीहमेशा यहीं रहोगीमेरे पास।मैंने अपने मन का रहस्य खोलते हुए कह डाला। दादी ने एक बार फिर मुझे अपने सीने से लगा लिया। वह पुराने कपड़ों की गठरी मानो सलमेसितारे टंके नयेताज़ा कपड़ों में बदल गई। 
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सपनों से जब पार गया मन 

सुंदर सपने, कोमल आशा 

पढ़ी प्रेम की यह परिभाषा,  

सपनों से जब पार गया मन 

संग निराशा छूटी आशा !

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नववर्ष 

स्वागत करो उसका,

पर उम्मीदें मत बांधो,

बहुत तकलीफ़ होती है,

जब टूटती हैं उम्मीदें. 

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हौसला और विश्वास मानव मन कह लीजिये या ज़िन्दगी के रंग ,बड़े ही विचित्र होते हैं । जब भी ज़िन्दगी ठोकर के रूप में फुरसत के दो पल देमानव मन कह लीजिये या ज़िन्दगी के रंग ,बड़े ही विचित्र होते हैं । जब भी ज़िन्दगी ठोकर के रूप में फुरसत के दो पल देती है ,मन या तो व्यतीत हुए अतीत की जुगाली करता रह जाता है या फिर अनदेखे से भविष्य की चिंता ... वर्तमान की न तो बात करता है ,न ही विचार और ज़िन्दगी एक खाली पड़े जार सी रीती छोड़ चल देता है ,इस जहान से उस अनदेखे जहान की यात्रा पर । 
निवेदिता श्रीवास्तव, झरोख़ा 
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प्रेरणादायक विचार 
राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी',  
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आज का उद्धरण 
विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल  
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" पृथ्वीराज रासौ : सँयोगिता - पृथ्वीराज की वीर गाथा : अमर युगल पात्र ग्रन्थ सेचंदरबरदाई कृत " पृथ्वीराज रासौ " से प्रेरित ~  काव्य कृति तब अमरता प्राप्त कर लेती है जब कथा - नायक व कथा - वस्तु तथा कहनेवाला भी दिव्य हो ! चारण चंद्रबरदाई रचित " पृथ्वीराज रासौ " ऐसी ही, अमर कृति  है।  ६१ सर्गों में  विभाजित महाकाव्य में काव्य कवित्त छप्पय, दोहा, तोमर, त्रोटक, गाहा व  आर्या का प्रयोग  ' रासौ '  महाकाव्य में चंद्र बरदाई  ने किया  है। जैसे कादंबरी के संबंध में प्रसिद्ध है कि उसका पिछला भाग बाण भट्ट के पुत्र ने पूरा किया है, वैसे  प्रचलित है कि " रासो " के पिछले भाग को चंदबरदाई  के पुत्र ' जल्हण ' ने  पूरा  किया । 
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मेरी भावना 

भोर की लाली लाई 

आदित्य आगमन की बधाई ।


रवि लाया एक नई किरण 

संजोये जो सपने हो पूरण

पा जायें सच में नवजीवन 


उत्साह की सुनहरी धूप का उजास 

भर दे सबके जीवन मे उल्लास ।

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कृतघ्नता की हद 

गली मोहल्ले के कुत्ते रोटी डालते ही

गेट पर दौड़े चले आते हैं

रात भर भौंकते हैं साथ में

पिल्ले भी कूँ कूँऽऽ चिल्लाते हैं


पीढ़ी दर पीढ़ी विराजमान हैं यहाँ

अक्सर गाड़ी से दबकर चोटिल हो जाते हैं

कई बार तो बिना इलाज

पड़े पड़े मर भी जाते है 

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दिल का दौरा 
कोलोस्ट्रोल व ट्राईग्लिसराईड डैडली कॉम्बो हैं, और उच्च रक्ताचाप तो सोने पर सुहागा है। हम यही कहेंगे कि डेयरी उत्पादों, मांसाहार, धूम्रपान, मद्यपान व तेल सबसे ज्यादा हानिकारक है। न उपयोग करें, उतना अच्छा। दादा तो बड़ी हस्ती हैं, प्रधानमंत्री जी फोन करके उनसे हालचाल पूछते हैं, व उनके लिये भारत के बेस्ट ह्रदय रोग विशेषज्ञों की तत्काल ही समिति बना दी गई, पर हम साधारण लोग हैं, हमारे लिये तो सामान्य सा डॉक्टर भी हमें लाईन में बिठायेगा। अपना व परिवार की सेहत का ध्यान हमें ही रखना है। 
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कुछ अनुभूतियाँ :01 

तुम प्यार बाँटते चलती हो

सद्भाव ,तुम्हारी चाह अलग

दुनिया को इस से क्या मतलब

दुनिया की अपनी राह अलग 

आनन्द पाठक, आपका ब्लॉग 
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धर्म-मज़हब के नाम पर 
बदायूं में हुई अमानुषिक घटना के बारे में सुन कर हम सब का दिल दहल गया है.
पाशविकता की हर सीमा को पार करते हुए इन हत्यारे दरिंदों ने भारतीय धर्म-समाज की प्रतिष्ठा को जैसी चोट पहुंचाई है उसका आकलन कर पाना असंभव है.
मेरा उद्देश्य इस घटना के विषय में विस्तार से चर्चा करना नहीं है बल्कि मैं चाहता हूँ कि इस घटना के बाद हम इस बात पर चर्चा करें कि हमारे देश में, हमारे समाज में, धर्म के नाम पर कैसे-कैसे प्रपंच होते हैं और किस तरह से किसी चमत्कार की आशा में भोले किन्तु मूर्ख लोग, महा-मक्कार, महा-छली, बाबाजियों, तांत्रिकों, मौलवियों, पादरियों, ग्रंथियों, फ़क़ीरों, साधुओं, आदि के जाल में फंस कर अपना सब कुछ लुटवा देते हैं.
गोपेश मोहन जैसवाल, तिरछी नज़र  
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पल भर का ठिकाना 
पार के तटबंध, किनारे खड़े अर्ध नग्न
बच्चों की आँखों में उभरते हैं, कुछ
रंगीन गुब्बारे, न जाने क्या
तलाशते हैं, वो मेरे वक्ष
के अंदर 
शांतनु सान्याल, अग्निशिखा 
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अब नहीं तो कब समझोगे  ( सियासत की हक़ीक़त )  डॉ लोक सेतिया अमेरिका में जो हुआ उसको खराब बताना ही काफ़ी नहीं है सीख सको तो इक सबक वहीं से सीखा जा सकता है। जो लोग देश से पहले किसी नेता व्यक्ति अथवा नायक के लिए वफ़ादारी रखते हैं कभी भी देश की व्यवस्था को चौपट कर उसकी प्रतिष्ठा को शर्मसार कर सकते हैं। खुद को विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र बताने वाला देश को कलंकित करता है खुद ही जब न केवल जनमत को स्वीकार नहीं करते सत्ताधारी शासक बल्कि देश के सबसे बड़े पद पर खड़ा नायक खनायक बनकर खुद ही अराजकता की बात करता है।  
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आज क लिए बस इतना ही...।
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14 comments:

  1. आदरणीय शास्त्री जी,नमस्कार! रोचक और ज्ञानवर्धक रचनाओं के उम्दा प्रस्तुतीकरण एवं संकलन संयोजन के लिए आपको बधाई..मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हृदय से अभिनंदन करती हूँ..सभी रचनाकारों को मेरी तरफ से शुभकामनाएं..सादर..

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  2. राजनीति का वीभत्स रूप जो अमेरिका में देखने को मिला, वह किसी भी देश में कभी न दोहराया जाए। सुंदर चर्चा, आभार !

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  3. आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी,
    यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि आपने मेरी कहानी को 'चर्चा मंच'में शामिल किया है। आप सदैव सभी का उत्साहवर्द्धन करते हैं आपकी यही विशेषता आपके बड़प्पन को स्थापित करती है और सदा मुझे प्रभावित करती है।
    आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद !!!
    सादर नमन 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

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  4. पठनीय एवं रोचक सामग्री की लिंक्स उपलब्ध कराने के लिए साधुवाद 🙏

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  5. आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी,
    आपका संयोजन सदैव उत्कृष्ट रहता है। सभी लिंक्स एक से बढ़ कर एक हैं।
    साथ ही मैं हृदय से आपके प्रति आभारी हूं कि आपने आज इस चर्चा में मेरी पोस्ट को शामिल किया है... साथ ही मेरी पोस्ट से ही शीर्षक पंक्ति का चयन किया है।
    पुनः बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद 🙏🌺💐🌺🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  6. बेहतरीन रचनाओं का संकलन । सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई

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  7. मुग्ध करते संकलन, सुन्दर प्रस्तुति, मुझे शामिल करने हेतु आभार आदरणीय शास्त्री जी - - नमन सह।

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  8. सुंदर रचनाओं का संकलन आदरणीय सर, सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमस्कार

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  9. शानदार लिंक,हर सामग्री पठनीय सुंदर।
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।

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  10. उत्कृष्ट रचनाओं के संकलन हेतु बधाई एवं शुभकामनाएँ।


    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हृदय तल से आभार।
    सादर।

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  11. सुंदर रचनाओं का संकलन.मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार।

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