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Tuesday, January 26, 2021

"यह गणतंत्र दिवस हमारे कर्तव्यों के नाम"(चर्चा अंक-3958)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

शीर्षक और भूमिका आ. अपर्णा बाजपेई जी की 

(कही-अनकही ) की रचना से 

आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

"आज सबसे जरूरी है कि 

हम अपने बच्चों को इस आज़ादी की कीमत समझाएं, 

उन्हें बताएं इस प्रजातंत्र ने उन्हें क्या शक्ति दी है, 

हमारे संविधान ने उन्हें क्या अधिकार दिए हैं 

और उनके क्या कर्तव्य हैं।"

(आज के परिवेश में ये नितांत आवश्यक हो चुका है)

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हमारी भावी पीढ़ी न जानती है और न समझना ही चाहती है 

कि -हमें ये आजादी किस कीमत पर मिली है 

आज हमारा ये परम कर्तव्य है कि -

हम अपने बच्चों को अधिकार के साथ- साथ कर्तव्य निभाना भी सिखाये 

भारत माता को नमन करते हुए चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की और.....

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देशगीत "गणतंत्र महान" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ज्ञान गंग की बहती धारा,
चन्दा-सूरज से उजियारा।
आन-बान और शान हमारी,
संविधान हम सबको प्यारा।
प्रजातंत्र पर भारत वाले,
करते हैं अभिमान।
सारे जग से न्यारा, 
अपना है गणतंत्र महान॥
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 "गणतंत्र दिवस"

स्कूल से घर आते बच्चों के  हर्षोल्लास में डूबे 

स्वर-"आज से ग्राउण्ड में जाना है “26 जनवरी" की तैयारी

के लिए"‎...उनका यह उद्घोष घर के बाकी सदस्यों को भी

जोश और उमंग भरे उनके

 स्कूली दिनों  की  याद दिला दिया करता था ।  बच्चों के

साथ वे भी अपने बालमन की स्मृतियों में डूब जाते ।

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जागो!हे ! हिंद वासियों,पावन इस गणतंत्र पर्व पर।

जागो!

हे ! हिंद वासियों,
पावन इस गणतंत्र पर्व पर।
जो चंद सिक्के फ़ेककर 
फ़ुसला रहे हैं ।
अवनी की धन-राशि लूटते 
पृष्ठ को पुष्ट करते 
प्रजातंत्र में राजतंत्र का 
भोग लगा रहे हैं।
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गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनायें

गणपति के देश में फलता-फूलता रहा है गणतन्त्र शताब्दियों से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं उन गणराज्यों की अनेक गाथाएं जहाँ भारत ने विकास के चरम को छुआ था लोकतान्त्रिक गणतन्त्र यह देश बना है मिसाल दुनिया के लिए
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हमारे अल्मोड़ा में विन्टर वैकेशन्स खूब लम्बी होती हैं। 
पापा की यूनीवर्सिटी तो विन्टर्स में पचास से भी ज़्यादा दिनों के लिए बन्द होती है। 
हम अपनी ज़्यादातर छुट्टियां अम्मा-बाबा के साथ लखनऊ में बिताते हैं।
 कुछ साल पहले तक हम विन्टर वैकेशन्स में उसी तरह से दिन बिताते थे
 जैसे कि जेल में कैदियों के बीतते हैं।
 छुट्टियों में भी हमारा टाइम टेबिल बना दिया जाता था। 

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 उसी तरह से दिन बिताते थे जैसे कि जेल में कैदियों के बीतते हैं।

ओ प्रवासी पक्षी

ओ प्रवासी पक्षी

 हम थके हारे राह देखते

हुए क्लांत से

तुम क्यूँ न आए ?

हर समय  आहट तुम्हारी

पंख फैला कर उड़ने की 

किस लिए बेचैनी  होती

मन में हमारे |

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असमानता ( बालिका दिवस पर विशेष )

मुझे डांटे जा रही हो बराबर
माँ ! जरा भाई को भी कुछ कहो
घूमता रहता है इधर 
तुम्हें हर वक़्त शिकायत रहती है मुझसे 
परेशान हो गई हूँ तुम्हारी रोज़ की हिदायत से 
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पराक्रम दिवस और 72 वाँ गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर (कविता)
अब देश जाग्रत हो रहा,
नेताजी को जल्द बुलाओ।
सो रहा जो युवा आज,
उसे उठाओ, उसे जगाओ।
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बिटिया का संदेश


बैठी थी इक ठांव मैं अपने,
                       बिखरे पन्ने लेकर जीवन के।
लाख कोशिश कर भी मैं, 
                   सुलझा न पाई उलझन मन की।
जीवन पथ की बाधाओं को, 
                         कविताओं में बांध रही थी।
हकीकत में जो सध न पाया, 
                         कहानियों में साध रही थी।
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चलते-चलते आ. जयकृष्ण जी की लिखी 
देश के नाम एक बेहद खूबसूरत गजल का आनंद उठाए 

 इनके ब्लॉग पर कमेंट गैजेट के ना होने की वजह से निमंत्रण देने में असमर्थ हूँ )

एक ग़ज़ल देश के नाम -

कहीं से लौट के आऊँ तुझीसे प्यार रहे

ये मुल्क ख़्वाब से सुंदर है जन्नतों से बड़ा 

यहाँ पे संत ,सिद्ध और दशावतर रहे 

मैं जब भी देखूँ लिपट जाऊँ पाँव को छू लूँ 

ये माँ का कर्ज़ है चुकता न हो उधार रहे 

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आज का सफर यही तक

आप सभी स्वस्थ रहें,सुरक्षित रहें 

कामिनी सिन्हा 

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14 comments:

  1. सुप्रभात !
    देशप्रेम की रचनाओं से सजा नायाब और रोचक संकलन संयोजन तथा उम्दा प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार कामिनी जी..आज के मंच पर मेरी रचना को चर्चा के लिए शामिल करके आपने मुझे हार्दिक खुशी दी है..जिसके लिए आपका हृदय से अभिनंदन करती हूँ..गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह..

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  2. जय गनतंत्र |मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यवाद |

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  3. बहुत सुन्दर और तिरंगे से रँगी बढ़िया चर्चा प्रस्तुति।
    गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
    आपका आभार आदरणीया कामिनी सिन्हा जी।

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  4. बहुत ही सुंदर सराहनीय संकलन आदरणीय कामिनी दीदी।
    बधाई एवं शुभकामनाएँ।
    सादर

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  5. राष्ट्र प्रेम भाव से सजी गणतंत्र दिवस पर बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति। ब्लॉग जगत के सभी साथियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।

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  6. चर्चा मंच के सभी मनीषियों, साहित्यकारों, सुधी पाठकों एवं संयोजकों को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
    डॉ. वर्षा सिंह

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  7. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!!!

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  8. बहुत खूबसूरत चर्चा प्रस्तुति, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  9. वाकई हर देशवासी को अपने कर्त्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है, आज दिल्ली में जो कुछ हुआ वह कभी न दोहराया जाये

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  10. जय भारत का उत्कृष्ठ गणतंत्र!!
    विचारणीय भूमिका के साथ अत्यंत मनभावन चर्चा सखी। आज की पीढी ने स्वतन्त्र भारत में आँखें खोली, सो उन्हें इस आजादी के मोल का ज्ञान नहीं हो सकता। उन्हें बताना होगा कि कितने लोगों ने अपने अनमोल जीवन की आहुतियाँ दी और राष्ट्र को तब स्वतंत्रता का उपहार मिला। हुतात्माओं का यशोगान सुनाना चाहिए भावी पीढी को। सभी को गणतंत्र दिवस की ढेरों शुभकामनाएं और बधाई। तुम्हें भी आभार और शुभकामनाएं सखी 🙏🙏🌹🌹❤❤

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  11. सभी से अनुरोध है कि ब्लॉग पर इन दिनों आ रही असाधारण पाठक संख्या के लिए मार्गदर्शन करें। इन दिनों बिना कोई रचना डाले stats में बहुत बड़ी पाठक संख्या दिख रही है। ज्यादातर विदेशों विशेषकर sweden, UK USA इत्यादि से हैं। जिसे भी पता हो निवेदन हैजरूर बताएं।

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  12. देशप्रेम की रचनाओं से इस बार का चर्चा मंच गुलजार रहा। बहुत सुंदर रचनाएँ आयी। सभी रचनाकरीं को गणतंत्र दिवस की अशेष शुभकामनाएँ👌!--ब्रजेंद्रनाथ

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  13. बेहद सुंदर प्रस्तुति

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  14. आप सभी स्नेहीजनों को तहेदिल से शुक्रिया एवं सादर नमस्कार, आप ने सही कहा अनिता जी-आज जो दिल्ली में हुआ वो नहीं होना चाहिए था

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