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Sunday, May 16, 2021

"हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में"(चर्चा अंक-4067)

सादर अभिवादन ! 

रविवार की प्रस्तुति में आप सभी प्रबुद्धजनों का पटल पर हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ !

आज की चर्चा का शीर्षक आ. शास्त्री सर द्वारा सृजित

  पुरानी रचना   "हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में" से लिया गया है ।

--

आइए अब बढ़ते हैं आज के चयनित सूत्रों की ओर-


"हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में" 

बात करते हैं हम पत्थरों से सदा,

हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में।

प्यार करते हैं हम पत्थरों से सदा,

ये तो शामिल हमारे हैं संसार में।।


देवता हैं यही, ये ही भगवान हैं,

सभ्यता से भरी एक पहचान हैं,

हमने इनको सजाया है घर-द्वार में।

ये तो शामिल हमारे हैं परिवार में।।

***

बन रहे मन तू चंदन वन

बन रे मन तू चंदन वन

सौरभ का बन अंश-अंश।


कण-कण में सुगंध जिसके 

हवा-हवा महक जिसके

चढ़ भाल सजा नारायण के

पोर -पोर शीतल बनके।


बन रे मन तू चंदन वन।

***

कोरोना में प्रेम कविताएं

तुम मुझसे दूर रहती हो,

जैसे मैं कोरोना होऊं,

पर मैं तुम्हारे अंदर हूँ.

तुम्हें पता नहीं है,

क्योंकि कोई सिम्प्टम नहीं है.

***

कोरोना, प्रमाण है ईश्वर का...

कोरोना,

एक परीक्षा है

शासन-प्रशासन के लिये

सभी द्रोणों के लिये भी

सभी अर्जुनों, भीमों

दुर्योधनों-दुशासनों के लिये भी…

***

मानवता के दूत

तुम्हारी माँ 

क्या ? हो सकती है मेरी माँ 

गर हाँ 

तो आओ 

मुझमें समा जाओ


तोड़ दो सारा बंधन

करो ग्रहण मेरा आलिंगन

***

बहुत सा अनकहा खोजा नहीं जा सकेगा उम्रभर

कैसा दौर है कि अचानक आई उम्र की इस ठिठकन में कोई भी अपना करीब नहीं था, सोचिएगा कि कितना कुछ अनकहा सा रह गया हो जिसे वह जो इस दुनिया में अब नहीं हैं बताना चाहते होंगे और उसे उस महत्वपूर्ण समय में सुनने वाला कोई नहीं होगा। ये कैसा अकेलापन और ये कैसा खौफनाक अंत।

***

काले दिन | कविता | डॉ शरद सिंह

अच्छे दिनों का सपना लिए

चले गए अनेक

अनन्त यात्रा में

बचे हुओं ने छोड़ दी है

अच्छे दिन की आस

हाथ लगे हैं

ब्लैक फंगल वाले काले दिन

***

पति-पत्नी का आपसी विश्वास और शोबिज़ की चकाचौंध के पीछे का सच

साज़िश’ में पाठक साहब ने लगभग सभी किरदारों को अपने आप उभरने और अपनी छाप छोड़ने का पूरा मौका दिया है । कथानायक अनिल ही नहीं, अन्य किरदार जो कि सहायक चरित्र ही कहे जा सकते हैं, भी कथानक के फ़लक पर अपना अलग वजूद बरक़रार रखते हैं और पाठकों पर अपना विशिष्ट प्रभाव छोड़ते हैं।

***

वो मोती टूटकर बिखर गया।

कहानी लिख रहा था, किरदार मेरा डर गया,

सामने तूफ़ान था, वो पिछले रास्ते से घर गया,

तुम्हारे प्रेम को मोती समझकर समेटता रहा,

पर हर बार वो मोती टूटकर बिखर गया।

***

औरों के हित जी ना पाये

दीपक के बुझने से पहले

हंसा खूब अंधेरा

अंधकार को दिया चुनौती

अंत हो गया तेरा.

दीपक मुस्काया फिर बोला

अंत है निश्चित सबका

***

बिना गन्ने के बनाये गन्ने का रस

क्या आप अभी लॉकडाउन में गन्ने का रस (sugarcane juice) मिस कर रहे है? यदि हां, तो जानिए घर पर प्राकृतिक तरीके से बिना गन्ने के गन्ने का रस बनाने का बिल्कुल आसान तरीका... ये रस पी कर कोई भी पहचान नहीं पाएगा कि ये रस बिना गन्ने

 के बना है!!

***

सजा भाग-13

हाँ एक प्लेट में माँ के लिए कुछ खाने को ले आओ और तुम भी उनके साथ बैठकर कुछ खा लेना। मैं रितु के पास जा रही हूँ।आज वो इस घर से विदा हो जाएगी,यह सोचकर ही उदास बैठी है..आती हूँ..! आराध्या रितु के लिए प्लेट लगाकर ले कमरे में चली गई।

***

आप से अनुरोध : घर पर रहें..सुरक्षित रहें..,

अपना व अपनों का ख्याल रखें,

आपका दिन मंगलमय हो…,

फिर मिलेंगे 🙏

"मीना भारद्वाज"ं



14 comments:

  1. आपका रचना चयन प्रशंसनीय है माननीया मीना जी।
    अभिनंदन एवं मेरे आलेख को स्थान देने हेतु आपका हार्दिक आभार।

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  2. बहुत अच्छा चयन और अच्छा अंक...। खूब बधाईयां आपको मीना जी। सभी रचनाएं अच्छी हैं और मेरे आलेख को स्थान देने के लिए आभारी हूं।

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  3. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार।

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  4. चर्चा मंच में मेरी कविता शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद मीना भारद्वाज जी 🙏

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  5. अच्छा चयन. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार।

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  6. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, मीना दी।

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  7. बहुत सुंदर चर्चा संकलन

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  8. shandaar, behtreen sankaln, aur aabhar ki aaj ke charcha manch pahadon ke pariwar par adharit tha, samay abhav se nitya blog par aana sambhav nahin hota mafi cahta hun, jab bhi manch kholta hun bahut dino ki pipasa tript ho jati hai. fir se sabhi rachnaon ke liye sadhuvad preshit

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  9. बहुत सुंदर लिंक चयन,सभी रचनाएं बहुत आकर्षक पठनीय।
    सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार मीना जी।
    सादर सस्नेह।

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  10. मेरी रचना को उचित स्थान प्रदान करने हेतु मंच प्रबंधन से जुड़े सभी महानुभावों का हृदय से आभार।

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  11. मेरी रचना को उचित स्थान प्रदान करने हेतु मंच प्रबंधन से जुड़े सभी महानुभावों का हृदय से आभार।

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  12. बेहतरीन चर्चा अंक मीना जी, सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमस्कार

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  13. बहुत सुंदर प्रस्तुति। मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार मीना जी।

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  14. आदरणीय मीना जी, नमस्कार !
    बहुत ही रोचक तथा पठनीय अंक, मेरी रचना के चयन के लिए आपका हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं,देर से ब्लॉग पर आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूं आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ।

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