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Thursday, January 20, 2022

'नवजात अर्चियाँ'(चर्चा अंक-4315)

 सादर अभिवादन। 
गुरुवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

शीर्षक व काव्यांश आ.कुसुम कोठारी जी की रचना 'नवजात अर्चियाँ' से-

प्राची की प्राचीरें
केसर दूध नहाई
लील वर्तुल झाँकती
नव नवनीत मलाई।


श्यामला मन मोहिनी
पाट अपना छोड़ती
द्यु मणि ने नैन खोले
पीठ अपनी मोड़ती
उजली नवजात सुता 
भोर निशा की जाई।।

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

 --

गीत "माँग रहे हैं ये वोटों का दान" 

सज्जनता का ओढ़ लबादा,
घूम रहे शैतान!
संकट में है हिन्दुस्तान!
संकट में है हिन्दुस्तान!!
--
कुनमुनी सी भोर ने 
तारक शैया छोड़ी
श्वेत कंठ पर शोभित
महारजत की तोड़ी
चंचल सी किरणों की 
ओढ़ ओढ़नी आई।
--
तुम किसी से यह बात मत कहना ,
कोई तुम्हारी दाह में जल रहा है |
 नयन में तुम्हारे सपने सजा कर ,
अश्रु में किसी के प्राण गल रहे हैं |
न दिन की खबर रही न शाम की 
बहारों का ही जलवा रहा 
जाने से उनके कुछ दिन , दिल अनमना सा रहा 
अहंकार बल दर्प कामना
निज हठ को ही सत्य मानना
मिथ्या ज्ञान द्वेष भावना
पर-मानव की निंदा करना.
ऐसी वृत्ति आसुरी होती
अनिष्ट आचरण जिसकी होती
---

इंसान का शरीर 

एक मशीन की तरह है

हज़ार अंजर-पंजर है

कब क्या बिगड़ जाए

एक उम्र के बाद

कुछ कह नहीं सकते 

प्राण छूट जाते हैं 

--

Tum mere khwabon mein aa jati ho.

नयनों की बातें तुम कितने अच्छे से समझाती हो,
जब भी तुम्हें सोंचता हूँ, तुम मेरे पास आ जाती हो,

गुलदस्तां

कायनात तू इन रूमानी जज्बातों की l
जिस्म आफ़ताब रूहानी अंदाज़ों की ll

फरिश्ता तू उन मीठी चिलमन रातों की l 
डूबी रही सहर जिनके बंद गुलज़ारों की ll
-- 

 “भगवान का नाम लेने के साथ-साथ इन सबके चर्चा-पुराण से अपने घर-परिवार को सुरक्षित रखने के लिए वसु ! कम से कम इन्सान सामने हो तो कोई मुँह पर बुराई तो नहीं करता।” साड़ी के पल्लू से माथे का पसीना पोंछते हुए वे थोड़ी सी व्यग्रता से बोली ।

              “लेकिन आज की चर्चा तो हो गई चाची !” कहती हुई वसुंधरा उन्हें दोराहे पर खड़ा छोड़ ऑटो की ओर बढ़ गई ।

--

कल फिर मिलेंगे 

9 comments:

  1. सभी लिंक्स शानदार। मेरी रचना शामिल करने के लिए विशेष आभार।

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  2. बहुत बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति|
    आपका आभार अनीता सैनी 'दीप्ति' जी!

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  3. बहुत सराहनीय चर्चा प्रस्तुति के लिए बधाई भी और शुभ कामनाएं भी ।

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  4. बेहतरीन प्रस्तुति, सभी रचनाएं बहुत आकर्षक और सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरे सृजन को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार
    अनीता जी ।

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  5. सुंदर सराहनीय अंक ।

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  6. शामिल करने का हृदय से धन्यवाद

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  7. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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  8. बेहतरीन रचना संकलन

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  9. शानदार चर्चा, मेरी रचना के शीर्षक को शीर्षक में सजाने के लिए हृदय से आभार।
    सभी रचनाएं बहुत आकर्षक पठनीय।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।

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