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Sunday, January 09, 2022

"वो अमृता... ज‍िसे हम अंडरएस्‍टीमेट करते रहे"'(चर्चा अंक-4304)

सादर अभिवादन 

आज रविवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक और भुमिका आदरणीया अलखनंदा सिंह जी की रचना रचना से )

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"घर का जोगी जोगना, आनगांव का स‍िद्ध' 

अर्थात् घर के योगी (ज्ञानी) के ज्ञान को जीरो और दूसरों के ज्ञान को स‍िर माथे लेना"

हमारी इसी मानसिकता ने तो अंग्रेजियत को हम पर हावी कर दिया

 अपने गुण और संस्कृति को हम भुलाते चलें। गये।कोरोना महामारी में आर्युवेद के चमत्कार को नमस्कार करना पड़ा। फिर भी हम इसे अपनाने से कतराते ही है। हमें तो महंगी गोलियों की आदत जो पड़ गई है। अब भी वक्त है सचेत जाते तो कीड़ों मकोड़ों की तरह मरने से बचा जा सकता है।

इस उपयोगी लेख के लिए आप को हार्दिक शुभकामनाएं अलकनंदा जी

 इसी उम्मीद से कि-

"हम सुधरेंगे युग सुधरेंगा"

चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर...

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 गीत "खुद को आभासी दुनिया में झोका" 

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

कभी न देखा पीछे मुड़कर,

कभी न देखा लेखा-जोखा।

कॉपी-कलम छोड़ कर खुद को,

आभासी दुनिया में झोका।।

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वो अमृता... ज‍िसे हम अंडरएस्‍टीमेट करते रहे

हां, आज जब सोचती हूं तो झे अपनी अज्ञानता पर क्षोभ होता है क‍ि लगभग दो साल तक मैं इसके फायदों से अनजान कैसे रही, या यूं कहें क‍ि इसे कभी गंभीरता से क्यों  नहीं ल‍िया। जो रोग दो साल पहले ठीक हो सकते थे और मेरा शारीरिक, मानसिक व आर्थ‍िक नुकसान कम हो सकता था, उस पर मेरी लापरवाही ही हावी रही।   ---------------------------------------- 

नर्सिगवाड़ी, कोल्हापुर से होते हुए गगनबावड़ा का भ्रमण:

 (यात्रा संस्मरण)

सुबह नर्सिघवाडी के मंदिर दर्शन के लिए तैयार होने में सभी लगे थे। साढ़े आठ बजे का समय निर्धारित था। मैंने शेव किया, स्नान किया और परिधान परिवर्तन कर चल दिये, कृष्णा किनारे। वहाँ पहुँचकर शांत दोनों किनारों में जल परिपूरित दक्षिण की ओर प्रवाहमान कृष्णा नदी के दर्शन हुए। भारतवर्ष में नदियों ने सभ्यता और सनातन धर्म के पोषण और परिवर्द्धन में जैसी भूमिका निभाई है, वैसी कहीं और दृष्टि गत नहीं होती है। 

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सर्दी के मौसम में चुनावी सरगर्मियां

अगर दुष्यंत कुमार नहीं समझाएं तो हर कोई यही समझेगा कि आम आदमी उनके सजदे
में झुका है.
उसने रैली में फ़क़त, मज़हब-धरम की बात की,
ये न पूछा किस के घर चूल्हा जला, अरमां नहीं !
दीन-ईमां बिक रहे हैं, अब चुनावी हाट में,

कौड़ियों के भाव भी, ग्राहक कोई मिलता नहीं !

 चंद्रमणि छंद में कमल के पर्यायवाची

सरसिज

सरसिज सोहे सर सकल, सरसाए सुंदर सरस,

मोहक मन को मोहते, सूना पुष्कर है अरस।।

पंकज

पंकज पद पूजूँ सदा, पावन पुलकित प्राण है। 

पीड़ा हरजन की हरे, जन-जन के संत्राण है।। 

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तुम ये दिल जब किसी का दुखाया करो

तुम ये दिल जब किसी का दुखाया करो,
दो कदम ग़म के भी तो बढ़ाया करो ।

सिरफिरा भी कहे गर वो पागल भी फिर,
ऐसे नख़रे भी फिर तुम उठाया करो ।

जो कहा ही नहीं, उसने वो भी सुना,
फिर तो किस्मत पे आँसू बहाया करो ।
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मुश्किल में ना घबराओ

भगवान तुम्हारे नयनों से आंसुओं को पोंछ दें।
विषमता पर जाएगी,मन में ऐसी सोच दे।
मुश्किल में ना घबराओ,सब काम सफल हो जाएगा।
कठिनाइयां आकर कदमों,देख तुरंत झूट जाएगा।
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रॉस तथा नॉर्थ बे टापू, अंडमान

हमारी RSCB संस्था ठोक-बजा कर ही किसी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपती है ! क्योंकि इनके द्वारा प्रायोजित यात्राओं के सदस्य वरिष्ठ नागरिक ही होते हैं ! हालांकि इनमे हौसले की कोई कमी नहीं होती पर फिर भी विशेष देख-रेख की जरुरत तो होती ही है ! तो दूसरे दिन यानी 12 दिसंबर को फेरी के द्वारा पहले नार्थ बे तट पर ले जाया गया ! पूरा अंडमान-निकोबार ही मूंगों का घर है ! इनको बचाए रखने पर पूरा ध्यान दिया जाता है ! इसीलिए फेरी वगैरह को तट से काफी दूर रोक दिया जाता है और पर्यटकों को फ्लोटिंग जेटी द्वारा तटों पर पहुंचाया जाता है ! 

----------------चलते -चलते, आज का अनमोल विचार प्रेम चाहिए तो समर्पण खर्च करना होगा

" प्रेम चाहिए तो समर्पण खर्च करना होगा,

विश्वास चाहिए तो निष्ठा खर्च करनी होगी,

         साथ चाहिए तो समय खर्च करना होगा,

मुफ्त मे तो हवा भी नही मिलती यहां, एक सांस छोड़ो तो..

 तभी एक सांस मिलती है "

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आज का सफर यही तक, अब आज्ञा दें..!

आप का दिन मंगलमय हो

कामिनी सिन्हा

10 comments:

  1. उपयोगी लिंक मिले पढ़ने के लिए|
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी|

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  2. उम्दा चर्चा

    मेरी पोस्ट को चर्चा में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आद. कामिनी सिन्हा जी

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  3. आदरणीया कामिनी सिन्हा जी, सार्थक चर्चा के लिए बहुत - बहुत साधुवाद! ब्रजेंद्रनाथ

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  4. प्रिय कामिनी जी ऊपर से नीचे तक कुछ भी ऐसा नहीं जिसे उपेक्षित किया जाय।
    शानदार चर्चा, उपयोगी भूमिका।
    सभी रचनाएं बहुत ही आकर्षक सुंदर।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा पर स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर सस्नेह।

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  5. बहुत ही सार्थक,सराहनीय अंक कामिनी जी । बहुत बहुत शुभकामनाएं ।

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  6. बहुत ही उम्दा लिंक सीए हैं आपने कामिनी जी ।बहुत बहुत शुभकामनायें !!

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  7. आप सभी स्नेहीजनों को हृदयतल से धन्यवाद एवं सादर अभिवादन 🙏

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  8. बहुत सुंदर चर्चा

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