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Wednesday, January 26, 2022

"मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र" (चर्चा-अंक4322)

 सभी पाठकों और देशवासियों को 

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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गीत "मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र" 

अंग्रेजी से ओत-प्रोत,
अपने भारत का तन्त्र,
मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।
मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।।

आजादी के बाद हमारी,
मौन हो गई भाषा,
देवनागरी के सपनों की,
गौण हो गई परिभाषा,
सब सुप्त हो गये छन्द-शास्त्र,
अभिलुप्त हो गये मन्त्र।
मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।। 
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दोहागीत 

"बिटिया दिवस" 

पर विशेष 

बेटी से आबाद हैंसबके घर-परिवार।

बेटों जैसे दीजिएबेटी को अधिकार।।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

उच्चारण 

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गूँगी गुड़िया : शेखावाटी रो बांकुड़ो 

लूँ रा झोंका बणे साथिड़ा

थार थपेड़ा हैं बापू।

पूत धोराँ रो माटी जायो 

सीमा ऊँट पैरा  नापू।

साथ घणेरो दे आशीषा 

जीवण कद जाणो थकणों।।

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चंदन माटी को माना 

संकल्पों की डोर थामकर 
चट्टानों से टकराना 
मन में बसती मां भारती 
चंदन माटी को माना।। 

मन के मोती 

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तुम देखना माँ 

मुझे दुर्बल समझने की
भूल न करना तुम
कोमलांगी भले ही हूँ लेकिन
आत्मबल की ज़रा भी
कमी नहीं है मुझमें !

Sudhinama 

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बेटियां 

आम की छांह में, नागचंपा के आंचल में, यूं ही गुड़हल सी सुर्ख हो, हंसती,खेलती, खिलखिलाती,झूमती रहे बेटियां

मेरे मन की 

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ग़ज़ल साथ चलते क़दम को मिलाओ कभी बढ़ रहे फ़ासलों को मिटाओ कभी ढाल बन कर रहें जो दुआ की तरह उनके सजदे में सर को झुकाओ कभी  चाँदनी रात ( लक्ष्य ) 

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लेफ्टी क्राइम अवार्ड्स 2022 के लिए नामांकित रचनाओं की सूची हुई जारी 

वार्षिक तौर पर अंग्रेजी में किए जा रहे रहस्यकथा लेखन के क्षेत्र में दिये जाने वाले 'लेफ्टी अवार्ड्स 2022' के लिए नामांकित रचनाओं की सूची हाल ही में जारी की गयी। यह सूची लेफ्ट कोस्ट क्राइम की वेबसाईट में प्रकाशित की गयी।  

बताते चलें  लेफ्ट कोस्ट क्राइम वार्षिक तौर पर आयोजित किया जाने वाला वार्षिक कन्वेन्शन है जो कि रहस्यकथा  प्रशंसकों और रहस्यकथा लेखकों द्वारा आयोजित किया जाता रहा है। हर वर्ष लेफ्ट कोस्ट क्राइम में अलग-अलग श्रेणियों में प्रकाशित उत्कृष्ट रहस्यकथाओं को 'लेफ्टी अवार्ड्स' से पुरस्कृत किया जाता है। इन पुरस्कारों के लिए लेफ्ट कोस्ट क्राइम के सदस्य अलग अलग श्रेणियों में प्रकाशित उपन्यासों के नामों को नामांकित करते हैं। 

वर्ष 2022 लेफ्टी अवार्ड्स के वह पुस्तकें मान्य थीं जिनका प्रकाशन वर्ष 2021 में अमेरिका और कनाडा में ई बुक या प्रिन्ट फॉर्म में किया गया था। अलग-अलग श्रेणियों में नामांकित पुस्तकें निम्न हैं: 

एक बुक जर्नल 

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मुरादाबाद के साहित्यकार स्मृतिशेष ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग की अठारह मुक्तछंद रचनाएं । ये कविताएं हमने ली हैं उनके गद्य गीत संग्रह - 'सांसों की समाधि' से । उनका यह संग्रह वर्ष 2013 में पार्थ प्रकाशन मुरादाबाद द्वारा प्रकाशित हुआ था। इस संग्रह की भूमिकाएं डॉ पूनम सिंह और राजीव सक्सेना ने लिखी हैं । 

 

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मासी मम्मा 

सच ही कहा है किसी ने ....
मेरे घर आई एक नन्ही परी.....

तुम क्या आई मेरे जीवन में 

जीवन की दिशा ही बदल गई
मां से बढ़कर तो नही
पर मासी का ये रिश्ता होता हैं 
बड़ा ही प्यारा सा दुलारा सा
नन्हें नन्हें कदमों से 
प्यारी प्यारी खुशियां लाई तुम 

दिल की बात 

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बालिका दिवस पर 

बड़ी माँ  खेती में पनपे
अनचाहे धान को उखा़ड़कर फेंकती
कुछ इसी तरह अनचाहा हुआ जन्म मेरा
छत पर किसी  पौधे के उग आने से
चितां में पड़ जाती थी दादी छत के टुटने के
कुछ ऐसा ही रहा जन्म मेरा 

कावेरी 

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Aa jao ek akhiri baar | आ जाओ एक आख़िरी बार। 

तुम आये नहीं अभी तक? मैंने इश्क़ का तमाशा कब का शुरू कर दिया। तुम्हें ये सब देखने की हिम्मत नहीं हो रही है? बेवफ़ाई करने को तो बड़ी जल्दी हिम्मत आ गयी थी। छोड़कर जाने को तो बेकरार हो रही थी। तो अब क्या हुआ? आ जाओ, एक आख़िरी बार।   

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'मोनिका ओ माय डार्लिंग' का जीनियस क्रिएटर 

आर डी बर्मन की 51 साल पुरानी धुनों का जादू आज भी वैसा ही बरकरार; रिपब्लिक डे परेड रिहर्सल के दौरान इंडियन नेवी बैंड की ओर से बजाई गई दोनों धुनें 1971 में रिलीज़ फिल्मों- अपना देश और कारवां से; खाली बोतल, गार्गल आदि से भी सुपरहिट म्यूज़िक निकाल लेते थे पंचम दा

देशनामा 

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मक्कारधर पद्धतिः की सीख 

तस्येव भवति साम्राज्यम्,यतो हि घोरकलियुगम्।।,
(दूसरे को पीड़ित करके ही जो महान् फल का भोग करते हैं,
उन्हीं का साम्राज्य होता है,
यही कलियुग की घोर नियति है।)

तिरछी नज़र 

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साइबर अपराध से सतर्क रहने की आवश्यकता वर्तमान तकनीकी दौर में मोबाइल ने जिस तेजी से जनमानस के बीच अपनी जगह बनाई है उतनी शायद ही किसी और उपकरण ने बनाई हो. मोबाइल, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि के समन्वय ने रोजमर्रा के कामों को भी बहुत हद तक सरल किया है. वर्तमान में समाज के लगभग सभी कार्य इंटरनेट के माध्यम से होने लगे हैं. सरकार हो या आम आदमीसरकारी संगठन हों या फिर निजी संस्थानव्यापार हो या फिर नौकरीशिक्षा हो या समाजसेवा सभी क्षेत्र आज इंटरनेट का लाभ उठा रहे हैं. इन तकनीकी उपकरणों के आरंभिक उपयोग में लोगों द्वारा, समाजशास्त्रियों द्वारा, मनोविज्ञानियों  आदि द्वारा इसके नुकसान बताते हुए इनके कम से कम उपयोग के लिए जोर दिया जाता था. सलाहों को बहुत हद तक स्वीकारा भी गया, बहुद हद तक अस्वीकार भी किया गया. जहाँ-जहाँ आवश्यकता समझ आई वहाँ इस तकनीक का उपयोग किया गया. रायटोक्रेट कुमारेन्द्र 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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12 comments:

  1. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

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  2. बहुत ही शानदार और उम्दा प्रस्तुति सभी अंक एक से बढ़कर एक है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है!
    गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं व बधाइयाँ 💐
    देश के वीरों को नमन🙏

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  3. बहुत अच्छी सामयिक चर्चा प्रस्तुति
    सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. बहुत ही सुन्दर सृजन सभी को गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं मेरी रचना को मंच पर स्थान देने के लिए बहुत आभार 🙏🏻🇳🇪

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  5. सुंदर संकलन मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति । सभी चर्चाकारों और रचनाकारों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ।

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  7. बहुत सुंदर प्रस्तुति। सभी रचनाकारों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  8. आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं,जय हिन्द जय भारत।
    बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार आदरणीय 🙏💐

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  9. सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ! चर्चामंच का आज का अंक बहुत ही सार्थक सूत्रों से सुसज्जित ! मेरी रचना को इसमें स्थान दिया आपका ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  10. वाह लाजबाव चर्चा प्रस्तुति
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

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  11. मुरादाबाद के साहित्यकार स्मृतिशेष ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग जी की रचनाएं साझा करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत आभार ।

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  12. सभी के रचना बेहतरीन । मेरी भी रचना को शामिल करने के लिए आभार शास्त्री जी 🙏

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